Category: संत दादू

रूप रंग से न्यारा

दादू देखा मैं प्यारा, अगम जो पंथ निहारा। अष्ट कँवल दल सुरत सबद में, रूप रंग से न्यारा। पिण्ड ब्रह्माण्ड और वेद कितेवे, पाँच तत्त के पारा। सत्त लोक …

पूजे पाहन पानी

दादू दुनिया दीवानी, पूजे पाहन पानी। गढ़ मूरत मंदिर में थापी, निव निव करत सलामी। चन्दन फूल अछत सिव ऊपर बकरा भेट भवानी। छप्पन भोग लगे ठाकुर को पावत …