Category: संजीव कुमार शर्मा

मैं कब से बैठा हूँ इसी सोच में गुमसुम-गुमसुम

मै कब से बैठा हूँ इसी सोच में गुमसुम-गुमसुम, कैसे शब्दों में लिखूँ अपने मन की बात। बेतहासा जरूरतों ने कर दिया जुदा सबको, पतझड़ में कैसे लिखूँ अब …