Category: संजीव कुमार

क्यों न कहूँ तेरे नैनों को……

क्यों न कहूँ तेरे नैनों को झील मैं क्यों तुझे देखे बगैर होता हूँ बेचैन मैं तुझसे लगी है दिल इस कदर तेरी यादों में झूमता हूँ इस कदर …

क्या बताऊँ तुम मेरी क्या हो !

क्या बताऊँ तुम मेरी क्या हो मैं नदी तुम मेरी रवानगी हो मैं सोच तुम मेरी संजीदगी हो मैं संगीत तुम मेरी लय हो क्या बताऊँ तुम मेरी क्या …

जनवाद

मिशनरियों के होर लगे हैं मानवता के डोर टूटे हैं सभी अपने कौम को बढ़ाने में मानवता को भूल चुके हैं कौम के रहनुमाओं तुम संभल जाओ सबसे ऊपर …

तस्सवुर में – संजीव

ये ग़ज़ल मैंने लिखी है तुम्हें तस्सवुर में रख-रख कर जी रहा हूँ इसलिए की कभी देखूंगा जी भर-भर कर तुम्हें तस्सवुर में रख-रख कर क्या जुनून है तुम्हें …

नैनों की मयूखैं – संजीव

तेरे नैनों की मयूखैं देख मैनु कहत न बनियाँ तेरे जैसा न इस तिहूँ भुवनियाँ तेरी बात गुंजती मेरी कर्णकुहर में तेरी याद घुमती मेरी अंतर्गुहावासों में तु हँसती …

नेता

नेता खुश हैं मित्र चकित भी, कैसा एक नेता दमखम वाला निकला, देश के उत्थान के लिए, वह लड़ेगा, देश बढ़ेगा, क्योंकि लड़ाइयों से ही बढ़े हैं देश उन्हें …

संभावित कदम

मंहगाई रोकने के लिए हर संभव कदम उठायेगी सरकार वित्तमंत्री सोच समझकर कहते हैं। सुरक्षा के सभी उपाय किये जायेंगे आंतरिक और बाह्‌य सुरक्षा सभी पर सरकार की कड़ी …