Category: ऋतुराज

जल रहा हैं हिन्दुस्तान

“आरक्षण की आग मे जल रहा हैं हिन्दुस्तान”, शिक्षा नौकरी पाने को बिक रहे हैं कई मकान, ठोकरे मिलती हैं यहा मिलता नही हैं ग्यान…. “आरक्षण की आग मे …

कभी इतनी धनवान मत बनना

कभी इतनी धनवान मत बनना कि लूट ली जाओ सस्ते स्कर्ट की प्रकट भव्यता के कारण हांग्जो की गुड़िया के पीछे वह आया होगा चुपचाप बाईं जेब से केवल …

दर्शन

आदमी के बनाए हुए दर्शन में दिपदिपाते हैं सर्वशक्तिमान उनकी साँवली बड़ी आँखों में कुछ प्रेम, कुछ उदारता, कुछ गर्वीलापन है भव्य वह भी कम नही है जो इंजीनियर …

लहर

द्वार के भीतर द्वार द्वार और द्वार और सबके अंत में एक नन्हीं मछली जिसे हवा की ज़रूरत है प्रत्येक द्वार में अकेलापन भरा है प्रत्येक द्वार में प्रेम …