Category: रविश चन्द्र

मरना नहीँ अब जीना है हमेँ…………….

मरना नहीँ अब जीना है हमेँ दुनिया के रश्मोँ मेँ उलझे कुर्बान होते मन के सपने रात भर हम रहते तड़पते दिन के उजाले मेँ भटकते आँखो से बस …

बस एक सवाल…

सादे सफेद कुरते कंधे पे साफा चमचमाती गाड़ी हाथ मेँ मोबाइल चार चमचे आगे चार चमचे पीछे साथ मेँ राइफल लटकाए दो गार्ड हमारे नेता हमारी गली धन्य हो …

बिटिया….

लाल लाल लहँगे मेँ लाली से बिटिया चुन्नी उड़ाती चंचल सी तेरी बिटिया आँचल मेँ सिमटे तेरी छुईमुई बिटिया भाईया को छेड़ती प्यारी सी बिटिया लक्ष्मी सी लागे मुझे …

जिन्दगी को जीओ..

आसमान मेँ उड़ने की थोड़ी हिम्मत करोँ यारोँ जमीन पे तो कायरोँ को भी पनाह मिल जाती है जिन्दगी को जीओ थोड़ा जिँदादिली से यारोँ कब्र मेँ तो मुर्दो …

क्या शहर बनाया तूने सुन खुदा के बंदे

क्या शहर बनाया तूने सुन खुदा के बंदे कुत्तोँ को भी यहाँ पनाह नहीँ मिलती  हर पल कुचला जाता यहाँ एक कुत्ता गाड़ियोँ की भीड़ से घबराया हर कुत्ता तेरे …

शायद कुछ बात है……………..

विक्षिप्त सा वो मेरा आकाश निराश रोते मेरे वो तारे मुरझा गया वो मेरा चाँद खो गयी वो तेरी मेरी रात सुबह का सूरज भी बेचैन किरणेँ गिरती धरती …