Category: रवि श्रीवास्तव

आख़िर खुदकुशी करते हैं क्यों ?

आख़िर खुदकुशी करते हैं क्यों ? जिंदगी जीने से डरते हैं क्यों ? फंदे पर लटककर झूले जीवन है अनमोल ये भूले। अपनों को देकर तो आंसू, छोड़ दिए …

उनकी तमन्ना

उन्होने तमन्नाओं को पूरा कर लिया, मुझे नही है उनसे कोई भी शिकवा। किसी के वादों से बधां मजबूर हूं, उन्हें लगता है शायद कमजोर हूं। बड़ो का आदर, …

आसूओं की आवाज़

क्या कसूर था मेरा, गोलियों से भून दिया, शिक्षा के मंदिर में बेगुनाहों का खून किया। सजाकर भेजा था, लाडले को अपने टूट गए उनके, जो देखे थे सपने। …