Category: रणदीप चौधरी ‘भरतपुरिया’

मैं किसान कहलाता हूँ

शीर्षक- मै किसान कहलाता हूँ मै आग उगलते आसमान की ही छाया में उम्मीद सैंकड़ो लेकर बैल चलाता हूँ हाँ, मैं किसान कहलाता हूँ ; ये बेमौसम बरसात सहीं …

कैदखाना

भूल जाने की कसमें हैं,फिर मिलने का बहाना है, ये तेरा दिल है जानेमन,या कोई कैदखाना है; कि ऐसे मूँद रखा है,तूने आगोश में अपने, ना मेरी नींद आँखों …

प्रयत्न कर

नाम- रणदीप चौधरी ‘भरतपुरिया’ मैं अभी 12th पास करके निकला हूँ मेरी हिंदी मे शुरू से ही रूचि रही है। अब मैं प्री_मेडिकल की तैयारी कर रहा हूँ और …