Category: राम निवास बांयला

(हिन्दी पखवाड़े पर विशेष) अभिषेक करें जन वाणी का

अभिषेक करें जन वाणी का अभिषेक करें जन वाणी का नागरी का,दीव्यागीर्वाणी का | ओंकार जन्मा,संस्कृत सृष्टा जग वन्दिनी, देव-नन्दिनी खलिहान-खनक,मात वाणी का । अभिषेक करें जन वाणी का …

टेरने आज़ादी

टेरने आज़ादी टेरने आज़ादी कीर कंकालों को पिंजरों से टांग दिया खुली हवा में बिजुकों की जगह हाथ में थमा दी मशालें कि बने रहो मशालची दिखाते रहो रास्ता …

किसान

किसान शीत, ताप बरखा आघात जोत हड्डि यां निचोड़ आंत बो कर सपने खुशी उगाता नि:शेष उदर निरीह अन्नदाता सृष्टि का जीवट आदर्श, वरदान निराय, निरापद कृश किसान ।

गज़ल

गज़ल उर उद्वेलन में पलकों से झरे हया लफ़्ज़ जो जा अटके थे ओष्ठ-प्रकोष्ठ संवेदी हूक संग आहिस्ता-आहिस्ता मेरे दिल में उतरे बांछें खिलीं और काफ़िए बन गए जो …

गज़ल -उर उद्वेलन में

उर उद्वेलन में पलकों से झरे हया लफ़्ज़ जो जा अटके थे ओष्ठ-प्रकोष्ठ संवेदी हूक संग आहिस्ता-आहिस्ता मेरे दिल में उतरे बांछें खिलीं और काफ़िए बन गए जो गुनगुनाए …

उतारने सूरज को आंगन

उतारने सूरज को आंगन नंगे पांव, सूखे बदन हाथ औज़ार, कांधे जिम्मेदारी नवल स्वप्न, सस्मित वदन धरा – विश्वकर्मा आदतन आज भी लामबद्ध, बनाने सीढ़ी आसमां की चोखट तक, …

प्रकाश स्तंभ का होना

प्रकाश स्तंभ का होना अधिकारी -अनाधिकारी जलयानों का दिग्दर्शक बन तट पर खड़ा ’स्थूल गन्तव्य’ तट का आभास-’प्रकाश स्तंभ’ । मगर तट पाने झंझा की नाव को ही जूझना-झेलना …

वे

वे     वे रचते रहे छन्द, प्रबन्ध मुझ, निर्बल की पीड़ा-प्रताड़ना पर पाते रहे प्रसिद्धि-पुरस्कार । भूल मुझे मनाते रहे जश्न । ताकि मिलते रहें- विषय, प्रतीक भावी …

फ़रमान

फ़रमान   वन-ग्वालों का वर्चस्व – अहं हुंकार ! फ़रमान – ’यहां वर्जित हैं – शांति प्रयास ।’ अन्यथा गाड़ दी जाएंगी कील । सुन वर्जना बुद्ध मुस्कराए शांति …

बदलाव

बदलाव अबोध-मासूम निश्छल-नव सृष्टा खेल-खेल में घरोंदे बनाता,सृजन करता । अज्ञात भाव से टहनी रोपता हरियाली हित पानी देता,रखवाली करता । गुड्डे की शादी करता शहनाई बजाता लकड़ी की …

मेरे १०१ हाइकू

मेरे १०१ हाइकू १ घास रोदन दुबारा अंकुरण जिजिविशा है । २ ताकते मोर आच्छादित गगन कब वर्षा हो। ३ बनाता घर मिट्टी द्वारा अबोध एक सृजन। ४ उन्हें …

नाम की तख्ती

नाम की तख्ती     मैं था निर्मल कोमल रंगहीन गंधहीन निरापद निर्भय बेनाम मदहीन क्या था? मालूम नहीं किन्तु मैं ’मैं’ नहीं था। आँखें खुलीं ही थीं कि कई रंगों …

रणधीर तेरी शहादत पर

रणधीर तेरी शहादत पर निकल पडे़ आँसू आज। ऊँचे मंडप, तोरण द्वार तेरा जय-घोष पर मन है व्याकुल आज। रणधीर तेरी शहादत पर निकल पड़े हैं आँसू आज। तेरा …

मजदूरन माँ

मजदूरन माँ   भट्टी ज्यों धधकती भू झुलसने वाली असह्य लू । योवन विषाद तर मातृत्व अवसाद सभर यह अस्तित्व । छलकता वक्ष वतसल्य ममता मूरत मञ्जु लावण्य । …

मजदूरन माँ

भट्टी ज्यों धधकती भू झुलसने वाली असह्य लू । योवन विषाद तर मातृत्व अवसाद सभर यह अस्तित्व । छलकता वक्ष वतसल्य ममता मूरत मञ्जु लावण्य । टोकरी थी उसके …