Category: राम केश मिश्र

जल रहा हैं हिन्दुस्तान

“आरक्षण की आग मे जल रहा हैं हिन्दुस्तान”, शिक्षा नौकरी पाने को बिक रहे हैं कई मकान, ठोकरे मिलती हैं यहा मिलता नही हैं ग्यान…. “आरक्षण की आग मे …

माँ(कुण्डलिया)

माँ (कुण्डलिया) माँ है नित्य निवेशिका , ममता समता नेह । कल्पवृक्ष की छाँव है ,तनिक नही सन्देह । तनिक नही सन्देह ,गेह को स्वर्ग बनाती । करके दुःख …

ग़ज़ल।जरूरत ही नही समझा।

ग़ज़ल ज़रूरत ही नही समझा । रदीफ़-ही नही समझा । काफ़िया-हक़ीक़त,मुहब्बत,अशिलियत आदि मतला- ग़मो के दर्द तन्हा को हक़ीक़त ही नही समझा । हमारे प्यार को तुमने मुहब्बत ही …

ग़ज़ल।खुद को मिटाया तो नही जाता ।

ग़ज़ल खुद को मिटाया तो नही जाता । मुहब्बत में किया वादा निभाया तो नही जाता । वफ़ा की चाह में दिल को दुखाया तो नही जाता ।। चलो …

ग़ज़ल।खुदा खुद की मुहब्बत का ।

ग़ज़ल।खुदा खुद की मुहब्बत का। रदीफ़ -का काफ़िया -मुरौव्वत,हक़ीक़त,हुकूमत,कीमत,आदि मतला- फ़ना कर उम्रभर देखो तमाशा बेमुरौव्वत का । पता फिर भी नही मिलता मुहब्बत में हक़ीक़त का । शेर- …

गजल।यहाँ शोहरत नही मिलती।

ग़ज़ल।यहाँ शोहरत नही मिलती । रदीफ़–नही मिलती काफ़िया–राहत चाहत शोहरत फुरसत आदि मतला– मिलेगी दर्द की महफ़िल कभी चाहत नही मिलती । दवा हर मर्ज की हाजिर मग़र राहत …

ग़ज़ल।दिवाने ऱोज आते है ।

ग़ज़ल ॥दिवाने रोज आते है । निगाहें प्यार में सपने सुहाने रोज आते है । यहाँ साहिल की महफ़िल में दिवाने रोज आते है । हुये नाक़ाम बेबस है …

ग़ज़ल।वही मेरी कहानी है ।

ग़ज़ल।वही तेरी कहानी है । किया गर दोस्ती हूँ तो यकीं मानो निभानी है । महफ़िल में रवां होकर मुझे मंजिल बनानी है । कहूँ मैं अज़नबी कैसे अगर …

हाइकू।ख़ामोश रात।

हाइकू।ख़ामोश रात। ख़ामोश रात सन्नाटे की आहट उड़ा उलूक रूप तुम्हारा झिलमिलाती आँख बिना रूप के स्वप्नलोक मे धुँधली सी छाया इंद्रधनुष ©राम केश मिश्र

गीत।मैंने मन को मार लिया है

गीत।मैंने मन को मार लिया है । । आ ही जाती याद तुम्हारी चाहे जितना मै भुलवाऊ ।। मैंने मन को मार लिया हैं पर दिल को कैसे समझाऊ …

ग़ज़ल।क़ीमत चुकाई तो नही जाती।

ग़ज़ल।कीमत चुकाई तो नही जाती। रदीफ़-तो नही जाती । काफ़िया–दिखाई चुकाई लुटाई बताई निभाई गवांई मिटाई भुलाई । मतला- अदाओं की कशिश हर पल दिखाई तो नही जाती । …

पगडण्डी के उस पार – होली आयी।

पगडण्डी के उस पार।होली आयी । होली आयी डरा गरीब पखवारे भर का दाम बस एक रात की शाम उम्मीद लगाते बच्चे किस्मत बेले पापड़ सहता त्योहारों का भार …

ग़ज़ल।मुहब्बत हो गयी होगी।

गज़ल।मुहब्बत हो गयी होगी । (16,18’1,20,13,1) नज़र की बेकसी दिल को शिनाखत हो गयी होगी । अशिलियत तुम छिपाओ पर मुहब्बत हो गयी होगी ।। तेरी नाजुक नज़ाक़त पर …

ग़ज़ल।वफ़ा के नाम पर।

ग़ज़ल ।वफ़ा के नाम पर मैंने। काफ़िया- लुटाई,जुदाई,मिलाई,निभाई आदि । रदीफ़-समझ पाया । मतला- वफ़ा के नाम पर दुनियां लुटाई तो समझ पाया । मुहब्बत में मिली मुझको जुदाई …

ग़ज़ल।यकीं ख़ुद पे हमारा है ।

ग़ज़ल। यकीं ख़ुद पे हमारा है । बिछड़कर जा रहे मुझसे बची यादें सहारा है । शरारत से भरे दिन की तरफ मेरा इशारा है ।। मिले थे हमसफ़र …

यह कैसा प्रेमजाल।कविता।

कविता। यह कैसा प्रेम जाल ? यह कैसा प्रेमजाल ? खिली मधुर मुस्कान स्मृतियां,मन,गाते तन-गान आह्लादित है प्रसून वह चेहरा अरे! भावनाओं की ओट शिकारी बना शिकार पगडण्डी के …

फिर नया साल।कविता ।

कविता।फिर नया साल । फिर नया साल पल्लवित होंगी झूठी आशाएँ सस्ती शुभकामनायें कुछ आधी-अधूरी यादें कुछ दूर हुए है रिस्ते धूमिल होता वो प्यार पगडण्डी के उस पार …

मुक्तक। कर्म,हौसला,कल्पना, के प्रति।

मुक्तक।कर्म,हौसला,कल्पना के प्रति। कर्म से जीवन सभी का है तरा तुम देख लेना ।। हौंसलो की उड़ानों को जरा तुम देख लेना ।। रास्तों के ही बिना जो कल्पनाओं …

पगडण्डी के उस पार।कविता।

कविता।पगडण्डी के उस पार। पूस की रात पूस की रात निशा भरे खर्राटे बनकर पहरेदार सुने सन्नाटे कुहरे धुंध की आहट धीरे-धीरे झुरमुट से चलती कछुआ चाल हाड़ कपाती …

हाइकू।वक्त की चाल।

हाइकू।उगता चाँद । लड़कपन कल्पना का भविष्य उगता चाँद निशा बावरी रचती प्रतिबिम्ब चाँद सितारे देखे अबोध भविष्य का दर्पण किलकारियां हर्षित मन पकड़ता चांदनी चाँद के साथ चन्दा …

वर्ण पिरामिड।वक्त की चाल।

पिरामिड। वक्त की चाल है रिश्ता शरीर संवाहक और प्राण का जन अधिकार सृष्टि का उपहार ये नाँव शरीर भौतिकता सागर मध्य नाविक है कर्म निश्चित दूरी धर्म तो …

कविता।भूखा मानव करे अलाप।

भूखा मानव करे अलाप भूखा मानव करे अलाप वह भूख नही पर आज भोजन बना समाज धन ,वैभव की होड़ ,गठजोड़ सम्बन्धों में घात छद्मवेश में दहता रहता पगडण्डी …