Category: रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

करो भोर का अभिनन्दन

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’   मत उदास हो मेरे मन करो भोर का अभिनन्दन ! काँटों का वन पार किया बस आगे है चन्दन-वन । बीती रात ,अँधेरा बीता करते …

माहिया1-12

-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ 1. ये भोर सुहानी है चिड़ियाँ मन्त्र पढ़ें सूरज सैलानी है 2. आँसू जब बहते हैं कितना दर्द भरा सब कुछ वे कहते हैं 3. मन-आँगन …

अमलतास के झूमर

धरती तपती लोहे जैसी गरम थपेड़े लू भी मारे । अमलतास तुम किसके बल पर खिल- खिल करते बाँह पसारे । पीले फूलों के गजरे तुम भरी दुपहरी में …

अधर पर मुस्कान

अधर पर मुस्कान दिल में डर लिये लोग ऐसे ही मिले पत्थर लिये।   आँधियाँ बरसात या कि बर्फ़ हो सो गये फुटपाथ पर ही घर लिये। धमकियों से …

अंधकार ये कैसा छाया

अंधकार ये कैसा छाया अंधकार ये कैसा छाया सूरज भी रह गया सहमकर । सिंहासन पर रावण बैठा फिर से राम चले वन पथ पर। लोग कपट के महलों …

आज़ादी है

नाचो गाओ ,खुशी मनाओ- आज़ादी है लूटो –खाओ , पियो-पिलाओ आज़ादी है भूखी जनता टूक न मिलता आज़ादी है छीनो -झपटो ,डाँटो –डपटो आज़ादी है दफ़्तर-दफ़्तर ,बैठे अजगर आज़ादी …

वहाँ मुझे पाओगे-(चोका)

पुकारोगे जो   मैं ठहर जाऊँगा तुम्हें छोड़ मैं भला कहाँ जाऊँगा तुम्हारे लिए पलक -पाँवड़े मैं बिछाता रहा गुनगुनाता रहा आज भी वहीं मैं नज़र आऊँगा दूर हो …

तुम्हारी याद( हाइकु)

1 दूर नभ में चुप तारा अकेला खोजे मीत को । 2 छाई उदासी मन-मरुभूमि में अँखियाँ प्यासी । 3 बाट है सूनी नहीं आया बटोही व्यथा है दूनी …