Category: राम शरण महर्जन

नई सालका शुभ-कामना !!!

दिन ढलते देखा इच्छाओें बढ़ते देखा खाली हातोंका पीड़ा देखा देखा तो नई क्यालेण्डर देखा उड़ते रंगोंमें कश्मकश जिंदगीमे बिखरती रिश्तोंमें फिर वही एलान देखा तो नई तारीख देखा …

तुम्हारी यादें

बर्षों बाद मिलें हम संजोग है यह धीमांसा याद हो गयी ताजा वह | सुनसान रास्तें याद दिलाते तुम्हें गुलजार लम्हें साथ रहे थे तुमसे | वक्त कम पड़ती …

अपनी सलामती

अनदेखी पीड़ाओं मुस्कुराहट में बदलती रगत-पसीनें में देखो सबकी नजर लगती | चिल्लाते-भटकते वो पागल आदमी घरवाले भी उससे मुड़कर यूं चलती | कैसे हुवा,क्यूँ हुवा उसकी ये दशा …

वक्त कैसे बदलते है

वक्त कैसे बदलते है सम्पति के पीछे जो दौड़े रिश्ते-नाते कुछ नहीं होते | बनि बनाये रिश्ते-नाते कागजकी ही टुकड़े होते | जिसे सबको दिखा सके अपने खातिर बता …

नये पुस्तें नये सिख

लाल रंग के एक गुलाब किसीकी हाथमे थमाती खुसी- खुसी देते अपनी जुवां किसीकी जिगरसे निकाली अपने आपको भी भुलाती गुलाब मरती चली रही थी अंतिम पलकी पलकें झपकती …

तुम्हारे लिए

ठंडीमें तुम्हारे श्वासें श्पर्स देना मुझको इलाजें नफ़रतें सही साथ देना मुझको | जी हल्का होने तक बदला लेना मुझसे दुश्मन बनी सही कुछ तो मिला मुझसे | उड़ाना, …

एक कच्ची धागें

शत्रुता क्या होती है नफ़रत करके तो देखो रिश्ता क्या होती है प्यार करके तो देखो गुनाह क्या होती है अपने नजर पे गिरके देखो ये सासें, ये एहसासे …

साथ होने का उमंग

हर श्वास में जीवन हर धड़कन में कर्म हर श्पर्श में प्यार साथ होने का ये उमंग | धुप-शाया, दुःख-सुख जीवन के अजुवा रंग पहचान की तरंग अपनापनका यादें …

रिश्तोंकी नीव

रिश्तोंकी नीव माँ-बाप का प्यार बंटता अपनी औलादोंमे भाई-भाई के प्यार छूटता जायदाद के पास दीदी-बहन का प्यार साथ देते जीवनभर रिश्ते निभातें पराया घर भरोसें टूटता अपनें आप …

अपनी सलामती

अपनी सलामती समयसे आगे होने के चककरमें छूटे तो छूटे ये रिश्तें नातें सब चाहिए तो बस अपनी सलामती मुद्दा ठोक दे या झगड़ा मोल लें ज़िंदा होने का …

आज का मूल्य

आज का मूल्य जीवन लुटाते माँ-बाप संतान के लिये जीवन लूटते संतान आज धक्के मारते पितृ ऋण चुकाते माँ-बाप परवारिशमें हिसाब मांगते संतान गर्व करते आपमें |

अपना-पराया

अपना-पराया किसे पत्ता नजरें लगे मुसीबतों को तुझे पत्ता अपनें होते खून की प्यासे | जलते सदा वो तरक्की करें तो तू फेंकते जाल वो सड़ती रहें सदा तू …

स्वागत है नयें वर्ष

स्वागत है नयें वर्ष ******************* समझो हर साल सालों में समा गए बचपन कब मारा अपने हाथों अपना तू यौवनका मस्ती कब भुला बढ़े उम्र में तू नयें रंग …