Category: राकेश प्रताप सिंह ‘निकुम्भ’

प्रेम और प्रबंध विवाह

प्रेम विवाह मे आप एक दूसरे को, काफ़ी अरसे से जानते हैं, मेरी होने वाली संगिनी देवी का काली रूप है, यह भली भाँति मानते हैं|   साल दो साल का …

दिल की द्स्तान

अगर तुमने एक पल के लिये भी मुझे अपन हक समझा तो ! उस पल कि कसम प्लीज बस एक बार मुझसे अपनी बात कहने का  मौका दो अरे मौत कि सजा पाये मुजरिम को भी अपनी बात कहने का मौक मिलता है ! क्या एक बार  मुझसे बात करने का करम नही करोगी! मुझे लईफ  आरेज कि बात करनी है मै अपने दिल की बात कैसे बताउ? मेर दिल  ही जानता मेरे दिल कि द्स्तान – अगर जिन्दगी एक साथ ना गुजर पाये तो एक सच्चा दोस्त समझ कर ही  रखना प्लीज निकुम्भ