Category: राकेश जयहिन्द

बदनसीब शायर

हर-एक शायर का कोई न कोई निशाँ रहता है। हर-एक चेहरा किसी चेहरे पर फ़ना रहता है। कुदरत लिखने के लिए वादियों की जरुरत नहीं। जहाँ ख्याल ले जाना …

कच्चे धागे

कच्चे धागों सा प्यार तुम्हारा, बस इतना समझ में आया। कश्मकशे न रखीं थी फिर भी, प्यार से प्यार निभाया। वो वक्त भी तुमको गवारा था, जो मेरे बिना …