Category: राजमोहन शर्मा

अकेलापन

भीड भरी दूनिया में, आज इन्सान अकेला है ! करता है जो जग को रोसन आज वो सूरज अकेला  है!   करता जो मेहनत-मजदूरी अपनो को सुख देने के लिए अपनो से भरे आँगन में आज वो इन्सान अकेला हैं!   कर-कर मेहनत थक जाता पर ना थकता, अपनो को गले लगाने से, उन्ही अपनो की चौखट पर आज वो इन्सान अकेला है!   जब-तक आता था न खेत से इन्तजार वो हीरे करते थे, उन्ही हीरो के हार के बीच आज वो इन्सान अकेला है !! राजमोहन शर्मा ‘साहवा ‘

सियासी गलियारे

आज सियासी गलियारो में रावण- राज नाच रहा है !   विभीषण का घर जल गया, कुंभकरण भी जाग रहा है, आज सियासी गलियारो में  रावण- राज नाच रहा है!   राम- राज का नाम लेकर , मन्थरा रानी बन बैठी है, रा्म अकेला बन में बैठा , भ्राता को ही जांच रहा है! आज सियासी गलियारो में, रा्वण राज-नाच रहा है!!   सीता आस लगाये बैठी , उसका राम भी आयेगा, भरत आस लगाये बैठा, उसका राम भी आयेगा! इनको  नहीं पता– इन सियासी गलितारो में, रावण-राज नाच रहा है!!

मां\Maa

बच्चे का पहला शब्द है, मां एक वर्ण से पूर्ण; शब्द है, मां जीवन मे सबसे प्यारी, बच्चे की पहली गुरू है,मां ! जब-जब बच्चा रोता है तब-तब तड्पती है,मां खुद गीले में सोकर सुखे में सुलाये;वो है मां !   पहला कदम रखे स्कूल में तब-भी याद आती है मां गुरू जी जब भी धमकाये तब-भी याद आती है,मां !   जो बच्चों से नराज ना हो जो बच्चों से दूर ना हो जिसकी डांट मे हो प्यार वो स्वजन होती है, मां !   सबसे पहले सहारा बनती हर-एक को चलना सिखाती जिसके बिना हर-एक अधूरा उस पूर्णता का नाम है मां !   बच्चे का स्वरूप है,मां जीवन का दूलार है,मां …