Category: राजीव उपाध्याय

राहें कहाँ हँसती कभी?

ना फासला हुआ कभी ना हौसला बँटा कभी उस राह का मैं राही हूँ रहगुजर जहाँ मिली ना कभी। रास्ते श्मशान से मंज़िलें अन्जान ही हर कदम दुश्वारियाँ हैं …