Category: राजेश ‘राज’

मैं रुका रहा और वक्त आगे चलता गया….

अपनी भी कुछ ख्वाइशें, कुछ सपने थे, कुछ तस्वीरों में हमें भी रंग भरने थे, न जाने क्यूँ, यूँ ही डरता गया, मैं रुका रहा और वक्त आगे चलता …