Category: राजेन्द्र गौड़

कहानी कहना चाहता हूँ

कहानी कहना चाहता हूँ । बिखरे हुए कांच की दबी हुई आवाज की कहानी… ढलती काली रात मेँ उस जिगर फाड़ती चीख की मख्खी को उड़ाते उन डगमगाते हाथोँ …