Category: रजत दाधीच

कैसे ?

हाल– ऐ –िदल उन्हें बताऊँ कैसे ? अपनी भावनाएँ उन्हें जताऊँ कैसे ? बातें इतनी घड़े में भरा हो समुदर जैसे। अधरों पर अटकी है गा कर उन्हें सुनाऊँ …