Category: राघवेन्द्र कुमार गुप्ता

जहाँ दुनिया ने एक मेला सा रखा है

चाँदनी रात में उनके लिए पैमाना बना रखा है, लेकिन उन्होने हाथ में खंजर को छुपा रखा है। ईश्क के मैदान में जो जीता न हो कभी, इंसान ने …

कागज पर तो मैंने कई अशआर लिखे है.

दूसरों को उसने प्रेम के इजहार लिखे हैं, मुझको तो बेरुखी के खत हजार लिखे हैं. होती है तेरे खत से तो उम्मीद फूल की, तूने तो जवाबों में …