Category: आर. चेतनक्रांति

तुष्ट-सम्पुष्ट छपास का शौकिया शोकगीत

कविता लिखने के सौ कारण थे और छपने का एक भी नहीं फिर भी मैं छपा -एक भाषा के डूबते टापू के सारे बाशिन्दे समुद्र के सारे सीप, सारे …

हम क्रांतिकारी नहीं थे

हम क्रांतिकारी नहीं थे हम सिर्फ अस्थिर थे और इस अस्थिरता में कई बार कुछ नाजुक मौक़ों पर जो हमें कहीं से कहीं पहुंचा सकते थे अराजक हो जाते …

मालिक का छत्ता

आसमान काला पड़ रहा था धरती नीली जब हमारे मालिक ने अपने मासिक दौरे पर पहला क़दम दफ़्तर में रखा दफ़्तर में बहुत सारी कोटरें थीं शुरू में आदमी …

ख़ुशी के अन्तहीन सागर में

खुशी खत्म ही नहीं होती कुछ ऐसी मस्ती छाई है कि रात-भर नींद नहीं आई है फिर भी सुबह चकाचक है हिृतिक रौशन प्यारा-प्यारा मुन्नी की आँखों का तारा …

आगे के बारे में एक ईर्ष्यासूत कविता

वे तो बढ़े ही चले जा रहे थे आगे, और आगे और आगे के बारे में उनकी राय तय हो चुकी थी कि जहाँ पीछेवालों की इच्छाएँ जाकर पसर …

श्रद्धावादी वक़्त में

श्रद्धा का सूर्य शिखर पर था सबसे ठंडे मौसम में भी जो गर्माती रहती थी भीतर ही भीतर चपल चापलूसी की चलायमान चांदी गुफ़ा में दहकती थी जो सतत, …

छटपटाकर जगह बदलना

मैंने जब साधुता से कहा–विदा और घूमकर दुर्जनता की बाँह गही वह कोई आम-सा दिन था खूब सारी ख़ूबियों की ख़ूब सारी गलियों में आवाजाही तेज़ थी मिन्दर के …

वे तुम्हें मज़बूर करेंगे

वे तुम्हें मज़बूर करेंगे कि तुम्हारा भी एक रूप हो निश्चित कि तुम्हारा भी हो एक दावा कि हो तुम्हारा भी एक वादा कि तुम्हारा भी एक स्टैण्ड हो …

औसत के राजमार्ग पर

सर्कस जैसा कुछ था चमत्कार की चमकार में रंग-बिरंगा `हय-हय-हैरानी´ में नंगा एक बौने के ऊपर संरक्षणार्थ या हायरार्की के सुप्रसिद्ध कानून के हितार्थ और, इसलिए भी कि ब्रह्मांड …

परिभाषित के दरबार में

सभी जाग्रत जीव जिनकी रगों के घोड़े मांद पर बंधे ध्यानरत खाते होंगे सन्तुलित-पुष्ट घास विचार करेंगे उन सभी पशुओं की नियति पर जिनके खुर नहीं आते उनके वश …