Category: प्रेम सिंह त्यागी

’’मेरा देश‘‘ (गीत)

2. ’’मेरा देश‘‘ (गीत) मेरा देश अलौकिक, भारत इसको कहते हैं। हिन्दू, मुस्लिम, सिख ईसाई, मिलेजुले रहते हैं। मेरे देश पर आये संकट, मिलजुल सब सहते हैं। मेरे देश …

तो बात कुछ और ही होती।

तो बात कुछ और ही होती। एक कवि दम्पत्ति राधाकृष्ण मन्दिर जाते हैं। दोनों अपने अपने इष्टों से मन में फरमाते हैं। पति – हे कृष्ण मुझे जिन्दगी का …

तो बात कुछ और ही होती।

तो बात कुछ और ही होती। एक कवि दम्पत्ति राधाकृष्ण मन्दिर जाते हैं। दोनों अपने अपने इष्टों से मन में फरमाते हैं। पति – हे कृष्ण मुझे जिन्दगी का …

श्र्ध्दान्जलि देश की बेटी को

सड्क पर चलती ओ बहना जज्बे का तेरा क्या कहना श्र्ध्दान्जलि मेरी लेती जा लघुता को दुआऐ देती जा बलिदान तेरा ये जीवन बेकार नही यो जयेगा आने वली तेरी पीडी को नया सबेरा लयेगा नर देही मे ये पिशाच जिन्दे पर आखो खट्केगे विश्वास लिये जा ओ बहना फासी पर ये सब लटकेगे लकीर खीच दी है तुने अपने देश की  छाती पर कब ये मिटेगा कला धब्बा मेरे देश की थाती पर नजीर बन गयी मेरे देश की जब जनता जग्रत होती है सड्को पर निकले ठिठुरन मे ये सर शैया पर सोती है इतिहास रचा तेरी मौत ने तु तो नीद चैन की सो गई जिन्दे पर थी एक दम्पत्ति की मरने पर बेटी देश की हो गई  

बाप की हार बेटे से हो जाती है

विज्ञान के छात्र ने, कुत्ते की पूंछ से कुछ गाया। बाप बोला बेटा, तू कुत्ते की पूंछ क्यों ले आया। छात्र बोला पिताजी, नहीं है, ये कुत्ते की पूंछ। …

माँ सरस्वती वन्दना

शीघ्र जाग इश्वर से नित मे पुरा ध्यान लगाउगा मधुर वचन सच सन्यम से समा सद्पयोग कराउगा चित्त प्रसन्न आत्म्बल से कर्तव्य परायण बनाउगा चरित्रहीन अत्याचारी को कभी गले नही लगाउगा