Category: प्रेम कुमार गौतम

दिल मेरा रह रह कर धड़कते है हर पल। हो मंज़िल मेरी आप , मुझे बतलाते है हल पल।

ये खामोश निगाहें ये आपका खुद में ही उलझ जाना। ये मन के होठों से अपने दिल ए दिमागों में बात लाना। ये झुकी पलकें ,ये भवों का लचकते …

तुम हो जहाँ वहीँ मेरा जीवन है। आप में पाया हमने हमने अपना दर्पण है।

आपकी वाहों में अब पूरा समर्पण है तुम हो जहाँ वहीँ मेरा जीवन है। आप में पाया हमने हमने अपना दर्पण है। कमियां दिखती नही हैं जिसमे मेरी , …

कम्पित होती धरती ,और प्रेम हमारा हुंकार भर रहा।

एक दूजे को मर मिटने को देखो कैसे बीज वो रहा। पल पल चढ़ते यौवन में हृदय कैसे गंबीर हो रहा। कैसे देखो लौ दीपक की ऊंचाई तक चढ़ने …

हमसे मिलने आ जाओ।

सफर तनहा नही रहता संग तुम चलते हो जब भी। प्रेम बिखरा नही रहता मुझमे बसते हो जब भी तुम्हारे ख्वावों में आता हूँ ,मेरे ख्वावों में आ जाओ। …

आज घर पर हमारे भी चाँद आएगा।

भुला कर गिले शिकवे वो प्यार लाएगा लालिमा अपने चहरे पर वो साथ लाएगा शीतलता से गर्म स्वभाव को ठंडा कर जायेगा आज घर पर हमारे भी चाँद आएगा …

वो आखों के रास्ते से मेरे दिल में आने लगे हैं।

आकर तितलियां मेरी गालों पे बैठने लगीं हैं। झुर्रियां का फेरा  समेटने लगीं हैं।  कुछ मधुकर मेरे कानों को गीत सुनाने लगे हैं। ये मेंढ़क भी मेरी चौखट पर …

जमाना भूल जाता हूँ।

जब भी तुम्हारी चाहत में मै हद से ज्यादा   डूब जाता हूं। कोई  नयी पंक्ति की धुन  को जब जब भी  तुम्हे सुनाता हूँ। जब भी तुम सुनते-सुनते  हँस …

ये तय है कि बिन तुम्हारे में जी नही सकता।

तुम्हारे ख्यालातों की डोर मैं तुमको दे नही सकता। नाराज हो कर भी मै नाराज तुमसे हो नही सकता। ये दूरी की साजिश है जो तुम हमसे रूठते हो …