Category: प्रज्ञा श्रीवास्तव

जीवन एक गणित है

जीवन एक गणित है बनाना है इसको यदि सुंदर तो इसमे मित्रों को जोड़ो दुश्मनों को घटाओ दुखों का करो भाग सुखों का गुणा करो समीकरण बनाओ अच्छे कर्मों …

मुझको भी कोई तो गुनगुनाएगा

लिखने वाले ने लिखा मुझे ये सोचकर मुझको भी कोई तो गुनगुनाएगा मंच की मल्लिका मैं बन ना सकी कदरदान मुझको कोई मिल ना सका तनहाईयों में जीती रही …

तुमने काटा है बहुत मुझे

तुमने काटा है बहुत मुझे मैं कुछ नही बोला सोचा तुम्हारी जरूरत है पर अब लगता है तुम्हारा लालच बढ़ता ही जा रहा है मेरे पयार और दुलार का …

बस बारातियों का स्वागत पानी पिलाकर किजिएगा

एक लड़का लड़की को देखने आया थोड़ा मुस्कुराया फिर शरमाया शरमाते हुए एक परचा लड़की को थमाया लड़की परची को खोलती लड़को की माँ तपाक से बोल दी हमें …

बाबूजी का चश्मा

उनमुक्त गगन मे उड़ते हुए पंछी कल-कल ,छल-छल बहती नदिया की धारा अक्सर याद आता है मुझे गरजते हुए मेघों की गड़गड़ाहट वो आँगन में नीम पे पड़ा झूला …

कर्ज

मैं हूँ क्यों फिक्र करते हो रहूँगा जीवन भर तुम्हारे साथ या तुम्हारे मरने के बाद भी तुम्हारे प्यार ने मुझे अपना बना लिया है मैं तुम्हारी हर मुश्किल …

प्रारंभ ही विजय का जब सूत्रधार है

प्रारंभ ही विजय का जब सूत्रधार है चंद्र की कला अपरंपार है अरूणिय लालिमा वातावरण को सुंदर बनाती है शशी की शीतलता मन को ठंडक पहुँचाती है यही प्रतिभा …

फिर खुदा ने दी आवाज

फिर खुदा ने दी आवाज अल्लाह ने पुकारा शिव का डमरु डोला विष्णु ने किया शंखनाद डोल गया ब्रहमांड हर-हर महादेव का टंकारा बोलो-बोलो क्या तुम्हे है भारत देश …