Category: प्रदीप राघव

पापा खो गए…

पापा खो गए, उन अंधेरी रातों में, भूली बिसरी यादों में, समंदर की गहराई में, आकाश की ऊंचाई में, मैंने उन्हें दर-दर ढूंढा, हर शहर हर मंज़र मैंने घूमा, …

कल सहर होते ही…

कल सहर होते ही पिताजी को बता देना, ये ख़बर उनके कानों को पहुंचा देना, मैं जा रहा हूं उन्हें छोड़कर ये फैसला उन्हें सुना देना, जब-जब आए उन्हें …

मेरे मकां में अब कोई नहीं रहता

मेरे मकां में अब कोई नहीं रहता, सिवाय वीरानी के… हैं चंद जाले और खिड़कियां भी हैं, पर झांकने वाला कोई नहीं.. गूंजती थीं जो आवाज़ें कल तक वहां, …