Category: प्रदीप

सुख दुःख दोनों रहते जिसमे – कभी धुप कभी छाँव (1965)

सुख दुःख दोनों रहते जिसमे जीवन है वो गाँव कभी धुप कभी छाँव कभी धुप तो कभी छाँव कभी धुप कभी छाँव कभी धुप तो कभी छाँव भले भी …

आज के इस इंसान को ये क्या हो गया – अमर रहे ये प्यार (1961)

आज के इस इंसान को ये क्या हो गया इसका पुराना प्यार कहाँ पर खो गया कैसी यह मनहूस घडी है, भाईओं में जंग छिड़ी है कहीं पे खून कहीं …

मुखड़ा देख ले प्राणी – दो बहनें (1959)

मुखड़ा देख ले देख ले मुखड़ा देख ले प्राणी ज़रा दर्पण में हो देख ले कितना पुन्य है कितना पाप तेरे जीवन में देख ले दर्पण में मुखड़ा देख …

दूसरों का दुखड़ा दुर करनेवाले – दश्हरा (1956)

दूसरों का दुखड़ा दुर करनेवाले तेरे दुःख दुर करेंगे राम दूसरों का दुखड़ा दुर करनेवाले तेरे दुःख दुर करेंगे राम किये जा तू जग में भलाई का काम तेरे …

आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झाँकी हिंदुस्तान की – जागृति (1954)

आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झाँकी हिंदुस्तान की, इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम … वंदे मातरम … उत्तर में रखवाली करता पर्वतराज विराट …

हम लाए हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के – जागृति (1954)

पासे सभी उलट गए दुश्मन की चाल के अक्षर सभी पलट गए भारत के भाल के मंज़िल पे आया मुल्क हर बला को टाल के सदियों के बाद फिर …

दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिन्दुस्तान हमारा है – किस्मत (1943)

आज हिमालय की चोटी से फ़िर हम ने ललकारा है दूर हटो ऐ  दूर हटो ऐ दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिन्दुस्तान हमारा है दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिन्दुस्तान …