Category: प्रदीप कुमार साहनी

कस लो कमर हे हिंद वासियों !!

कस लो कमर हे हिंद वासियों, हिंदी को चमकाना है, भारत माँ के माथे की बिंदी में इसे सजाना है ।  अब बेड़ियों से आज़ादी इसको हमें दिलाना है, …

कर तो लो आराम

रंजिश में ही बीत गई है तेरी तो हर शाम, छुट्टी लेकर बैर भाव से, कर तो लो आराम |   आपा-धापी, भागम-भाग में, ठोकर खाकर, गिर संभलकर, कभी …

जख्मों का हिसाब (दर्द भरी हास्य कविता)

फटी-सी एक डायरी में, लिख रखा है मैंने; है पाई-पाई का तेरे, हर जख्मों का हिसाब |   कब तूने तोड़ा दिल, कब की थी रुसवाई; कब हुई थी …

मेरी चाहत

क्या हुआ जो तूने ये होंठ सिल रखे, आँखों ने तो तेरी सब बयाँ कर दिया, माना कि प्यार है खामोशियों से तुम्हे, धडकनों ने शोर यहाँ वहां कर …