Category: पंकज मिश्रा

सज़ा

गाल भिगाने की खातिर क्यूँ आँख सताया करते हो, ज़िम्मेदारी के पर्दे मैं, क्यूँ हँसी छुपाया करते हो, नाम आँखें कमज़ोर नही, ये सच्ची हैं कोई चोर नही, क्यूँ …