Category: ओमेन्द्र शुक्ला

“तुम थे ना कभी वादों में मेरे”

“तुम थे ना कभी वादों में मेरे ना ही थे कभी इरादों में क्यों आया दिल सहसा तुमपे चंद मीठी मीठी बातों में , क्यूँ जीना बनता है गद्दारी …

||लांसनायक श्री हनुमनथप्पा जी को समर्पित ||

“छोड़ चला है पुनः कोई आज हमें इन वीरानों में आँखे नम हो आयी है फिर से उन सरहद के बलिदानों से , कर गए नाम अमर तुम अपना …

||मूसलाधार बारिश | हाइकू ||

“मूसलाधार कण्टक सी बारिश हो रही आज | प्रसन्न हिय कृषको का वर्षा से असीम ख़ुशी | सोंधी महक ये पावन मिट्टी की फैली मुस्कान | ईश प्रार्थ में …

||देशहित के लिए खुद में परिवर्तन जरुरी ||

“हर साल बदलते जाते है हम कैलेंडर नए -नए से घर में ना सोचा कभी है हमने कुछ बदलाव करने की खुद में , देख समाचार देश दुनिया के …

||मिटती भारतीयता ||हाइकू ||

||मिटती भारतीयता ||हाइकू || “असभ्य लोग अर्धनग्न शरीर खोयी संस्कृति | दुर्लभ प्रेम मिटती आत्मीयता स्वार्थी भावना | आर्थिक जग श्रेष्ठता उपहास टूटती आशा | सत्कर्म ढोंग मिटती संस्कृतियाँ …

|बदनसीब किसान |हाइकू ||

|बदनसीब किसान |हाइकू || “बारिश नहीं सुखी हुई जमीन उड़ता धूल | मजबूरिया दम तोड़ता किसान डूबती आशा | अधूरे लोग सहायता ना कोई अर्थविहीन | संशय मन आत्महत्या …

||आतंरिक दुश्मन ||हाइकू ||

||आतंरिक दुश्मन ||हाइकू || “जंगी जवान सीमा पर तैनात वीर पुरुष | रक्षा करते शहीद होते वीर मानव धर्म | पापी मानव देश को तोड़ते नेता मूक जनता | …

||मजहबी भारत ||

“सम्बोधन कई अपनाये थे दादरी में हिन्दू आतंक ,हिन्दू तालिबान ना कोई सम्बोधन मालदा पे आता है नाही किसी की पिसती है शान , सिर्फ हिन्दू ही क्यूँ दोषी …