Category: नरोत्तमदास

सुदामा चरित

विप्र सुदामा बसत हैं, सदा आपने धाम। भीख माँगि भोजन करैं, हिये जपत हरि-नाम॥३॥ ताकी घरनी पतिव्रता, गहै वेद की रीति। सलज सुशील सुबुद्धि अति, पति सेवा सौं प्रीति॥४॥ …

सुदामा चरित भाग 12

  अगनित गज वाजि रथ पालकी समाज, ब्रजराज महाराज राजन-समाज के। बानिक विविध बने मंदिर कनक सोहैं, मानिक जरे से मन मोहें देवतान के। हिरा लाल ललित झरोखन में …

सुदामा चरित भाग 11

करि सिंगार पिय पै गई, पान खाति मुसुकाति। कहौ कथा सब आदि तें, किमि दीन्हों सौगाति।।106।।     कही कथा सब आदि ते, राह चले की पीर। सेावत जिमि …

सुदामा चरित भाग 10-1

बसन उतारे जाइ कै, धोवत चरन-सरोज। चौकी पै छबि देत यौं, जनु तनु धरे मनोज।।96।।     पहिरि पादुका बिप्र बर, पीढा बैठे जाय। रति ते अति छवि- आगरी, …

सुदामा चरित भाग 10

0000 भाग-4 कृष्ण महिमा गान 0000   (सुदामा ) – कामधेनु सुरतरू सहित, दीन्हीं सब बलवीर। जानि पीर गुरू बन्धु जन, हरि हरि लीन्हीं पीर।।87।।     विविध भॉति …

सुदामा चरित भाग 9

ठाडी पंडिताइन कहत मंजु भावन सों, प्यारे परौं पाइन तिहारोई यह घरू है। आये चलि हरौं श्रम कीन्हों तुम भूरि दुःख, दारिद गमायो यों हॅसत गह्यो करू है। रिद्धि …

सुदामा चरित भाग 8

0000 भाग-3 पुनः ग्रह आगमन 000 (सुदामा ) – वैसेइ राज.समाज बनेए गज.बाजि घनेए मन संभ्रम छायौ। वैसेइ कंचन के सब धाम हैंए द्वारिके के महिलों फिरि आयौ। भौन …

सुदामा चरित भाग 7

वह पुलकनि वह उठ मिलनिए वह आदर की भाँति। यह पठवनि गोपाल कीए कछू ना जानी जाति॥प्प्६१प्प्     घर.घर कर ओड़त फिरेए तनक दही के काज। कहा भयौ …

सुदामा चरित भाग 6

हूल हियरा मैं सब काननि परी है टेर, भेंटत सुदामै स्याम चाबि न अघातहीं। कहै नरात्तम रिद्धि सिद्धिन में सोर भयो, डाढी थरहरक और सोचें कमला तहीं। नाकलोक नागलोक …

सुदामा चरित भाग 5

जिनके चरनन को सलिल, हरत गत सन्ताप। पाँय सुदामा विप्र के धोवत , ते हरि आप।।41।।     ऐसे बेहाल बेवाइन सों पगए कंटक.जाल लगे पुनि जोये। हाय! महादुख …

सुदामा चरित भाग 4

  दीन जानि काहू पुरूस, कर गहि लीन्हों आय। दीन द्वार ठाढो कियो, दीनदयाल के जाय।।31।।     द्वारपाल द्विज जानि कै, कीन्हीं दण्ड प्रनाम। विप्र कृपा करि भाषिये, …

सुदामा चरित भाग 3

(सुदामा) द्वारिका जाहु जू द्वारिका जाहु जू, आठहु जाम यहै झक तेरे। जौ न कहौ करिये तो बड़ौ दुख, जैये कहाँ अपनी गति हेरे॥ द्वार खरे प्रभु के छरिया …

सुदामा चरित भाग 2

(सुदामा) छाँड़ि सबै जक तोहि लगी बक, आठहु जाम यहै झक ठानी। जातहि दैहैं, लदाय लढ़ा भरि, लैहैं लदाय यहै जिय जानी॥ पाँउ कहाँ ते अटारि अटा, जिनको विधि …

सुदामा चरित भाग 1

भाग-1 प्रेरक वार्तालाप (मंगलाचरण) गनपति कृपानिधान विद्या वेद विवेक जुत । छेहु मोहिं वरदान हर्ष सहित हरिगुन कहौ ।।1।। हरिचरित बहु भाई सेस दिनेस न कहि सकै । प्रेम …