Category: नितिन कुमार पाण्डेय

हुस्न-ए-यार

ठहरी हुई सांसें मेरी आवारा कर गयी खुश्बू तेरे एहसास की जो मुझको छू गयी रंग-ए-सफ़ेद पैरहन में लिपटी हुई मूरत काली सियाह रातों में एक नूर भर गयी …

पहली मुलाक़ात

वो वस्ल-ए-यार का लम्हा अभी तक याद है मुझको बेसब्र दिल का वो धक से धड़कना याद है मुझको दीदार-ए-यार को मुन्तज़िर डूबी हुई आँखें मुख़ातिब होते ही हैरान …

तल्खियाँ

मुझे वो हमेशा समझ लेगा, यही गुमान-ए-सुकून था मेरा हाथ वो भी छुड़ा रहा कभी मुझपे जिसको ग़ुरूर था ये जो ताल्लुक में हैं तल्खियाँ न मुझे, न उसको …

क़ुर्बतें

अजब सी कश्मकश है तेरी उल्फत में मेरी जाना मिले जितना मगर फिर भी थोड़ा कम ही लगता है नज़र की शोखियां, बेबाकपन और शरमाना तुम्हारा ये करम भी …

हाल-ए-दिल

जैसा तूने कहा वैसा हर बार कर दिया तेरे इश्क़ ने मुझको बीमार कर दिया छीन लिया है मेरा चैन-ओ-करार और जीना मेरा दुश्वार कर दिया ना जाने कितनी …

तुम

ख्यालों में तुमको ही पाया है मैंने तुम्हे अपने दिल में बसाया है मैंने तुम्ही से मेरे दिन तुम्ही मेरी रातें ख़ामोशी मेरी तुम तुम्ही मेरी बातें तुम्ही मेरी …

हिचकियाँ

ज़िक्र होता है मेरा बारहा उसकी जुबां पर हिचकियाँ बेसबब मुझे यूँ ही नहीं आती वो जब सोती है तो भीग जाता है तकिये का कोना सिसकियाँ बेसबब मुझे …