Category: निशांत

प्रेमचंद को पढ़ते हुए

हमारे नाम के भीतर बैठे होते हैं हमारे पुरखे उनकी स्मृतियां हमारी सभ्यताएं संस्कृतियां इतिहास और कभा-कभी उनका भूगोल भी क्यों किसी का नाम गोबर धनिया फेंकना मिठइया होता …

पौने दो घंटे

आधा घंटा चुरा लिया है मैंने सुबह के समय में समाचार-पत्र पढ़ने के लिए एक घंटा चुरा लिया है मैंने दोपहर की कार्यावधि के बीच से कहानियों को पढ़ने …

तुम्हारी याद को

पत्थरों के बीच मैंने तुम्हारे संगीत को सुना हड्डियों के कड़कड़ाके टूटने की गन्ध और बारिश से भीगे पत्थर लम्बे-लम्बे घास जिसमें छिपे हम और हवा में घुलता हुआ …

केदारनाथ सिंह को याद करते हुए

पहली बार कहाँ देखा था केदारनाथ सिंह को कोलकाता के ठनठनियों काली मंदिर के पास एक गोरा-गारा ठिगना आदमी चला जा रहा था दो-चार लोगों के साथ “यही केदारनाथ सिंह हैं। हिंदी के …

केदारनाथ सिंह को पढ़ते हुए

फ़र्क पड़ता है, केदार “तुमने जहाँ लिखा है ‘प्यार’ वहाँ लिख दो सड़क फ़र्क क्या पड़ता है बस्ती में एक लड़की रस्सी से झूलते हुए पाई जाती है, केदार …

केदारनाथ सिंह को देखते हुए

केदारनाथ सिंह को देखते हुए एक बाघ देखा केदारनाथ सिंह को देखते हुए एक बाप देखा केदारनाथ सिंह को देखते हुए सिर्फ केदार देखा और कुछ नहीं।

इकतीस की उम्र में

आकाश इतनी बड़ी शुभकामनाएँ और पृथ्वी इतना बड़ा प्यार मुझे मालूम है, दोस्त! इकतीस की उम्र में नौकरी पाने की हताशा और ऊब से ऊपर उठने का आनंद ‘ …

अट्ठाइस साल की उम्र में

सचमुच यही उसके प्रेम करने की सही उम्र है जहाँ उसके सपनों में लहलहा रहा हो एक पवित्र सुर्ख़ लाल गुलाब इसी उम्र में दिल से निकलती है सच्ची …