Category: निसर्ग भट्ट

“अंतरमन का अवलोकन”

उन खोखले वादों की कटारों से, हम हररोज़ कटते रहते है, उन भयंकर भ्रमजालों से, बहार निकल नहीं पाते है । उस अदृश्य आशा की तलाश में, हररोज़ भटकते …

ये भगवा ही तो है पहचान हमारी

वेदों का विलक्षण विचार है ये, पुराणों के पवित्रता की पराकाष्ठा है ये, उपनिषदों की उदारता का उदाहरण है ये, और गीता का गौरवशाली ज्ञान है ये, ये भगवा …

अकेलपन की अंगड़ाइयाँ

पता नहीं कभी कभी क्यों खुद को इतना अकेला पाता हूँ, हजारों की भीड़ में भी पंछियों के सुरों को सुन पाता हु । कभी समंदरों से भी गहरी …