Category: निर्देश कुदेशिया

उलझे तेरी वातो मे रह लिये

फूलो की तरह ही काँटों मे रह लिये मुद्दतो उलझे तेरी वातों मे रह लिये परिन्दे वैचेन है पर नही परवाज को यूँ हीं वंद हम जज्बातों मे रह …

लौट जाने आयेंगें

जानते है तुमको याद नही आयेंगें इक रोज पर हम चले जाने आयेंगें तन्हाई में काट दी ये जिन्दगी मेंने फिर अगले जन्म मे तुझे पाने आयेंगें तेरी बेरूखी …

इश्क करना छोड़ दिया

हमने जिक्र-ए-हाल करना छोड़ दिया सिलसिला रश्म अदायगी का करना छोड़ दिया अब भी बहुत है हमको अपना कहने वाले बस रौनक उसी से थी जिसने कहना छोड़ दिया …

तुम हो पर तुम नही

अजीब इत्तेफाक है तुम हो पर तुम नही अजीब इत्तेफाक है हम भी गर्दिशे गम नही व्यान हो रहीं है गुफ्तगु तेरी मेरी आज भी अर्जदार एक-दूजे के हम …

जिक्र तेरा

मेरे अनसुलझे प्रश्नो का हल तुम हो मेरे वादों मेरे सपनो का कल तुम हो उम्मीदें ख्वाहिशे मिले है मुझे तुमसे मेरे अधरों पर मुस्कान का बल तुम हो …

उसका हक

मेर जिन्दगी मुक्कमल तेरी बा-हक जायेगी मेरा तिनका-तिनका बिखेर फिर महक आयेगी मेरी जिद से तो हवायें भी वाकिफ है यहाँ ये आस तब थकेगी जब साँस रूक जायेगी …

समर पथ

जिवित है प्राणी चल रहा धीमें-धीमें हरदम हरपल चलती है परछाई उसके पीछें-पीछें राह कठिन पा जाता है खुदा को दोषी ठहराता है जान वचाने की खातिर वो क्या-क्या …