Category: निखिल गुप्ता

लत : बुरी आदत

दुर्गम दीपं दीर्घ भ्रमण में सर्वम पर्वम शांत रमण हम जन्म-जन्मांतर सर्व जनम में कोण-प्रतिकोण सम-अवयव में हृत्वाकर्षण द्रुत वेग से होते चहुँ दोष सुदृढ़ आकर्षित || “द्रव्यं द्रव्यं” …

दम्भ – The ego of a capitalist

थिरक रही अभिमान निहित झनक झंझावत, सकल दया-मेघ निज शीश्चुम्ब अविरल बरसत; निज पद विस्तृत भूमि-विरचित मनहु कृपा , मोहे ही बस रखे भिगोये, शेष वारि लूं हथचंद्र छिपा …