Category: नीरज गोस्वामी

हर बशर ने आते – जाते उसको बस पत्थर दिए

जिस शजर ने डालियों पर देखिए फल भर दिए हर बशर ने आते – जाते उसको बस पत्थर दिए रब की नज़रों में सभी इक हैं तो उसने क्यों …

हमेशा बात ये दिल ने कही है

हमेशा बात ये दिल ने कही है तुम्‍हारा साथ हो तो जिंदगी है उछालो ज़ोर से कितना भी यारों उछल कर चीज़ हर नीचे गिरी है किसी के दर्द …

हजारों में किसी इक आध के ही ग़ैर होते हैं

हजारों में किसी इक आध के ही ग़ैर होते हैं वगरना दुश्मनी करते हैं जो होते वो अपने हैं कभी मेरे भी दिल में चांदनी बिखरा जरा अपनी सुना …

सूखे पेड़ों पे फूल आते हैं

आप जब टकटकी लगाते हैं सूखे पेड़ों पे फूल आते हैं कान में बाँसुरी सी बजती है आप जब नाम से बुलाते हैं तेरे मिलने का भरोसा जिनको वो …

सितम जब ज़माने ने जी भर के ढाये

सितम जब ज़माने ने जी भर के ढाये भरी सांस गहरी बहुत खिलखिलाये कसीदे पढ़े जब तलक खुश रहे वो खरी बात की तो बहुत तिलमिलाये न समझे किसी …

साथ लेकर वो सलीबों को चला करते हैं

बोल कर सच ही जियेंगे जो कहा करते हैं साथ लेकर वो सलीबों को चला करते हैं आ पलट देते हैं हम मिल के सियासत जिसमें हुक्मराँ अपनी रिआया …

सब को अपना हाल सुनाना, ठीक नहीं

सब को अपना हाल सुनाना, ठीक नहीं औरों के यूँ दर्द जगाना, ठीक नहीं हम आँखों की भाषा भी पढ़ लेते हैं हमको बच्चों सा फुसलाना, ठीक नहीं ये …

संजीदगी, वाबस्तगी, शाइस्तगी, खुद-आगही

संजीदगी, वाबस्तगी, शाइस्तगी, खुद-आगही आसूदगी, इंसानियत, जिसमें नहीं, क्या आदमी ये खीरगी, ये दिलबरी, ये कमसिनी, ये नाज़ुकी दो चार दिन का खेल है, सब कुछ यहाँ पर आरिज़ी …

वक़्त उड़ता-सा चला जाता है

वक़्त उड़ता सा चला जाता है जब कोई साथ मुस्कुराता है साँसें बोझिल सी होने लगती हैं जब भी वो याद मुझको आता है ख़ार ज़ालिम है हँसता डाली …

मजे की बात है जिनका, हमेशा ध्यान रखते हैं

मज़े की बात है जिनका, हमेशा ध्यान रखते हैं वोही अपने निशाने पर, हमारी जान रखते हैं मुहब्बत, फूल, खुशियाँ,पोटली भर के दुआओं की सदा हम साथ में अपने, …

भीड़ के संग भीड़ से कटके

ज़िन्दगी में यहाँ- वहाँ भटके क्या मिला अंत में बता खटके आचरण में न बात ला पाये वक़्त ज़ाया किया उसे रटके आखरी जब उड़ान हो या रब मन …

बोल कर सच ही जियेंगे जो कहा करते हैं

बोल कर सच ही जियेंगे जो कहा करते हैं साथ लेकर वो सलीबों को चला करते हैं आ पलट देते हैं हम मिल के सियासत जिसमें हुक्मरां अपनी रिआया …

देख कर फूल सहम जाता है

कब अंधेरों से खौफ खाता है वो जो तन्हाइयों में गाता है ग़म तो अक्सर ये देखा है मैंने उसका बढ़ता है जो दबाता है काँटे आए हो जिसके …

दूरियां मत बढ़ा इस कदर

दिल मिले दिल से फ़क़त इतना ज़रूरी है मियां क्यूँ मिलाते फिर रहे हो प्यार में तुम राशियाँ बारिशों का है तक़ाज़ा, सब तकल्‍लुफ़ छोड़कर दें सदा बचपन को …

दिल मिले दिल से फ़क़त इतना ज़रूरी है मियाँ

दिल मिले दिल से फ़क़त इतना ज़रूरी है मियाँ क्यूँ मिलाते फिर रहे हो प्यार में तुम राशियाँ बारिशों का है तक़ाज़ा, सब तकल्‍लुफ़ छोड़कर दें सदा बचपन को …

दर्द दिल में मगर लब पे मुस्कान है

दर्द दिल में मगर लब पे मुस्कान है हौसलों की हमारे ये पहचान है लाख कोशिश करो आके जाती नहीं याद इक बिन बुलाई सी महमान है खिलखिलाता है …

दबाना मत कि उसका, आँख से झरना ज़रूरी है

कभी ऐलान ताक़त का, हमें करना ज़रूरी है समंदर ओक में अपनी, कभी भरना ज़रूरी है उठे सैलाब यादों का, अगर मन में कभी तेरे दबाना मत कि उसका, …

तेरे आने का है असर शायद

कुछ सदा में रही कसर शायद वरना जाते यहीं ठहर शायद दर्द तन्हाई का ना पूछ मुझे उससे बदतर नहीं क़हर शायद तेज़ थी धूप छा गई बदली तेरे …

तेरे आँगन में जा बरसता हूँ

याद जब भी तुझे मैं करता हूँ नीम के फूल-सा, महकता हूँ कुछ कमी है हमारे मिलने में क्यों भला मिलके भी, तरसता हूँ चाहे जो भी मैं रास्ता …

तू मचल कहकहे लगाने को

हाल बेताब हों रुलाने को तू मचल कहकहे लगाने को मुश्किलों का गणित ये कैसा है बढ़ गयीं जब चला घटाने को दौड़ हम हारते नहीं लेकिन थम गये …

तुम नहीं साथ तो फिर याद भी आते क्यूँ हो

तुम नहीं साथ तो फिर याद भी आते क्यूँ हो इस कमी का मुझे एहसास दिलाते क्यूँ हो डर जमाने का नहीं दिल में तुम्हारे तो फिर रेत पर …

तुझे दिल याद करता है तो नग्‍़मे गुनगुनाता हूँ

तुझे दिल याद करता है तो नग्‍़मे गुनगुनाता हूँ जुदाई के पलों की मुश्किलों को यूं घटाता हूं जिसे सब ढूंढ़ते फिरते हैं मंदिर और मस्जिद में हवाओं में …

तन्हाई में गाया कर

तन्हाई में गाया कर खुद से भी बतियाया कर हर राही उस से गुज़रे ऐसी राह बनाया कर रिश्तों में गर्माहट ला मुद्दे मत गरमाया कर चाँद छुपे जब …