Category: नज़र लखनवी

सोज़ाँ ग़मे-जावेद से दिल भी है जिगर भी

सोज़ाँ ग़मे-जावेद से दिल भी है जिगर भी। इक आह का शोला कि इधर भी है उधर भी॥ वो अंजुमने-नाज़ है और रंगे-तग़ाफ़ुल। याँ मरहलये-आह भी, अन्दोहे-असर भी॥ वो …

सुन लो कि मर्गे-महफ़िल कुछ मौतबर नहीं है

सुन लो कि रंगे-महफ़िल कुछ मौतबर नहीं है। है इक ज़बान गोया, शमये-सहर नहीं है॥ मुद्दत से ढूंढ़ता हूँ मिलता मगर नहीं है। वो इक सकूने-ख़ातिर जो बेश्तर नहीं …

सिवादे-शामे-ग़म से रूह थर्राती है क़ालिब में

सिवादे-शामे-ग़म से रूह थर्राती है क़ालिब में। नहीं मालूम क्या होगा, जो इस शब की सहर होगी॥ क़फ़स से छूटकर पहुँचे न हम, दीवारे-गुलशन तक। रसाई आशियाँ तक किस तरह बेबालो-पर …

वो एक तुम कि सरापा बहारो-नाज़शे-गुल

वो एक तुम कि सरापा बहारो-नाज़शे-गुल। वो एक मैं कि नहीं सूरत आशनाए-बहार॥ ज़मीं पै लाल-ओ-गुहर बन के आशकार हुआ। छुपा न ख़ाक में जब हुस्ने-ख़ुदनुमाए-बहार॥ तआलुके़-गुलो-शबनम है राज़े-उलफ़त …

मेरी सूरत देख कर क्यूँ तुमने ठंडी साँस ली

मेरी सूरत देखकर क्यों तुमने ठंड़ी साँस ली? बेकसों पर रहम—आईने-सितमगारी नहीं। हर तरफ़ से यह सदा आती है मुल्के-हुस्न में- “यह वो दुनिया है जहाँ रस्मे-वफ़ादारी नहीं॥”

कोई मुझ-सा मुस्तहक़े-रहमो-ग़मख़्वारी नहीं

कोई मुझ सा मुस्तहके़-रहमो-ग़मख़्वारी नहीं। सौ मरज़ है और बज़ाहिर कोई बीमारी नहीं॥ इश्क़ की नाकामियों ने इस तरह खींचा है तूल। मेरे ग़मख़्वारों को अब चाराये-ग़मख़्वारी नहीं॥

अभी मरना बहुत दुश्वार है ग़म की कशाकश से

अभी मरना बहुत दुश्वार है ग़म की कशाकश से। अदा हो जायेगा यह फ़र्ज़ बी फ़ुरसत अगर होगी॥ मुआफ़ ऐ हमनशीं! गर आह कोई लब पै आ जाए। तबीयत …