Category: नवीन कुमार ‘आर्यावर्ती’

कब तक

मान, सम्मान, अधिकार पाने के लिए बचाने के लिए कितने इन्तजार, कितनी मिन्नते कितने आरजू बार-बार रोज-रोज कितनी बार सप्ताहिक पक्शिक मासिक वर्षवार मान, सम्मान, अधिकार क्या? इसपर हक. …

लाल कलम

“लाल कलम” मेरा जीवन लिख रही थी लाल कलम! लिखते-लिखते रो रही थी लाल कलम!! पन्नों की राहों में, राही कहलाते हुए! आंसू की बूंदें, स्याही कहलाते हुए!! थर-थर, …

वेतन

कर्मचारी हो या पदाधिकारी सभी वेतन के उत्राधिकारी वेतन के आस में लगे रह्ते कर्मी निजी हो या सरकारी पदाधिकारियो को क्या चिन्ता कर्मचारियो की सुनो दास्ता जिनके साथ …

दो शब्द

“दो शब्द” आपके अनुरोध पर दो शब्द कहना चाह्ता हू दो शब्दो मे__ अपनी अभिव्यक्ति व्यक्त करना चाह्ता हू अब्ला की कमजोरी मनचलो की हवश बेरोजगारो की लाचारी अमीरो …

परिनाम

“परिणाम”   अतुल अभिराम अब्ज, कैसे करूँ अकथ गुणगान- मैं अलि तेरा अनुचर, उभय प्रणय रहे अविराम-   प्रसाद विचरण संद्ध्य में, प्रणय  बास  फैलाती हुई – कई बार किया पथ विचलित, तंगपट में व्याकुल प्राण-   हर सहर  सुध आती है, …