Category: नवल पाल प्रभाकर

“एक सफ़र” – दुर्गेश मिश्रा

– एक सफ़र देखे मैंने इस सफर में दुनिया के अद्भुत नज़ारे, दूर बैठी शोर गुल से यमुना को माटी में मिलते | की देखा मैंने इस सफर में….. …

बदलता जमाना

वक़्त है आज गुजर जाएगा तेरा साथ है एक दिन छूट जाएगा बदलेगा जमाना तू भी बदल जाएगा वक़्त है आज गुजर जाएगा तू आज साथ है मै बड़ा …

भीड़ मे खो जाने दो

भीड़ है भीड़ मे खो जाने दो कुछ अपना सा हो जाने दो तनहा हूँ मैं , तनहा हो जाने दो एक बस मकसद है , पूरा हो जाने …

जल रहा हैं हिन्दुस्तान

“आरक्षण की आग मे जल रहा हैं हिन्दुस्तान”, शिक्षा नौकरी पाने को बिक रहे हैं कई मकान, ठोकरे मिलती हैं यहा मिलता नही हैं ग्यान…. “आरक्षण की आग मे …

तेरी तस्वीर

तेरी तस्वीर   टूटे-फुटे से जर्जर पुराने फ्रेम में तेरी तस्वीर न जाने कहां लुप्त हो गई। शायद धूल ने इसे ढांप लिया या फिर खुद फ्रेम ने चेहरा …

मां

मां बहती आंखें छलकता आंचल मां का कलेजा स्वच्छ सुकोमल। ले आंखों में अधूरे सपने पालती नन्हें शिशु को अपने कर कमलों को देकर पीड़ा बनाती जीवन को मधुबन। …

मधुर मिलन

मधुर मिलन दूर-सूदूर क्षितिज पर मिल रहे गले में बाहें डाल मतवाली धरती, ओर बादल लाल। धरती सजी-संवरी हुई। प्रेम से ओत-प्रोत हुई। हरे रंग की चुनरी ओढे़ चल …

बुढ़ापा

बुढ़ापा। आंखे द्रवित मन निर्झर देह बनी अस्थि पिंजर । रंग हुआ सस्य- श्यामल काल ने डस लिया हर अंग चांदी बना हर स्याह बाल सब कुछ बदल जाता …

संध्या

संध्या उजियारे अंधियारे ने लेकर अपने आगोश में प्रकृति पर ये थोंप दिया काले रंग से तन पोत दिया । सारे वस्त्र ओर चेहरा दिन के हंसी उजाले में …

तुम्हारी याद

तुम्हारी याद ये मधुर चांदनी हवा गा रही रागनी इतने हंसी मौसम में याद तुम्हारी सता रही। हवा के झौंको के साथ आती तेरे बदन की खुशबु तन को …

गरीब पंक्तियां

गरीब पंक्तियां मेरी कविता की चंद पंक्तियां फूलों की भांति महकती हुई-सी जीर्ण-शीर्ण कपड़े पहने मुख पर चमक दमक लिये सूरज की लाली-सी लाल हरियाली-सी हरी-भरी हर शब्द चंचल …

मेरी रचनाएं

मेरी रचनाएं मेरी रचनाएं शायद कुंवारी ही रह जायेंगी वो मूक हैं बेचारी मूक ही चली जायेंगी। अंधी और बधिर इन रचनाओं से शादी करने को कोई भी तैयार …

कुरूप बुढ़ापा

कुरूप बुढ़ापा कमर झुकी तन शिथिल हुआ बुढापे ने क्या हाल किया। चेहरे पर झुर्रियां व्यापी, रूप कुरूप बना दिया। हड्डियों के ढ़ांचे में जैसे धड़कन साफ दिखाई देती …

सांसों की बेल

सांसों की बेल सांसों की बेल कड़-कड़ कर टूटने लगी है जंग लग कर पर तुम्हारी यादों का मंजर याद आता है थम-थम कर । आंखों में छाई अजीब-सी …

पतझड़ ऋतु

पतझड़ ऋतु आज बयार शीतल होकर चलने लगी है मंद-मंद सूखे पात बजते हैं ऐसे जैसे बजते हों मृदंग। पतों की हंसी ठिठोलियां घुमना-फिरना हर नगर आना जाना हर …

गरीब पंक्तियां

गरीब पंक्तियां मेरी कविता की चंद पंक्तियां फूलों की भांति महकती हुई-सी जीर्ण-शीर्ण कपड़े पहने मुख पर चमक दमक लिये सूरज की लाली-सी लाल हरियाली-सी हरी-भरी हर शब्द चंचल …

मेरी रचनाएं

मेरी रचनाएं मेरी रचनाएं शायद कुंवारी ही रह जायेंगी वो मूक हैं बेचारी मूक ही चली जायेंगी। अंधी और बधिर इन रचनाओं से शादी करने को कोई भी तैयार …

तुम्हारी याद

तुम्हारी याद ये मधुर चांदनी हवा गा रही रागनी इतने हंसी मौसम में याद तुम्हारी सता रही। हवा के झौंको के साथ आती तेरे बदन की खुशबु तन को …

बसंत जी।

बसंत जी। पैरांे में मखमली जूतियां सिर पर पगड़ी फूलों की हरियाली रूपी ओढ़ काम्बली आ गए महंत बसंत जी। बयार चले ठंडी होकर तन में कंपकंपी बंध जाती …

सुहानी धूप

सुहानी धूप सूर्य की धूप ने घेरा है मुझको कुछ ऐसे जैसे बल्लरी लिपटी हो किसी आम के पेड़ से। बल्लरी की भांति बन प्रेमिका लिपट गई है यह …

पतझड़ ऋतु

पतझड़ ऋतु आज बयार शीतल होकर चलने लगी है मंद-मंद सूखे पात बजते हैं ऐसे जैसे बजते हों मृदंग। पतों की हंसी ठिठोलियां घुमना-फिरना हर नगर आना जाना हर …