Category: नासिर काज़मी

होती है तेरे नाम से वहशत कभी कभी

होती है तेरे नाम से वहशत कभी-कभी बरहमहुई है यूँ भी तबीयत कभी-कभी ऐ दिल किसे नसीब ये तौफ़ीक़-ए-इज़्तिराब मिलती है ज़िन्दगी में ये राहत कभी-कभी तेरे करम से ऐ …

हुस्न को दिल में छुपा कर देखो

हुस्न को दिल में छुपा कर देखो ध्यान की शमा जला कर देखो क्या खबर कोई दफीना मिल जाये कोई दीवार गिरा कर देखो फाख्ता चुप है बड़ी देर …

सफ़र-ए-मन्ज़िल-ए-शब याद नहीं

सफ़र-ए-मंज़िल-ए-शब याद नहीं लोग रुख़्सत हुये कब याद नहीं दिल में हर वक़्त चुभन रहती थी थी मुझे किस की तलब याद नहीं वो सितारा थी कि शबनम थी …

वो साहिलों पे गाने वाले क्या हुए

वो साहिलों पे गाने वाले क्या हुए वो कश्तियाँ जलाने वाले क्या हुए वो सुबह आते-आते रह गई कहाँ जो क़ाफ़िले थे आने वाले क्या हुए मैं जिन की …

वो दिल नवाज़ है नज़र शनास नहीं

वो दिल नवाज़ है लेकिन नज़र-शनास नहीं मेरा इलाज मेरे चारागर के पास नहीं तड़प रहे हैं ज़बाँ पर कई सवाल मगर मेरे लिये कोई शयान-ए-इल्तमास नहीं तेरे उजालों …

ये भी क्या शाम-ए-मुलाक़ात आई

ये भी क्या शाम-ए-मुलाक़ात आई लब पे मुश्किल से तेरी बात आई सुबह से चुप हैं तेरे हिज्र नसीब हाय क्या होगा अगर रात आई बस्तियाँ छोड़ के बरसे …

मुसलसल बेकली दिल को रही है

मुसलसल बेकली दिल को रही है मगर जीने की सूरत तो रही है मैं क्यूँ फिरता हूँ तन्हा मारा-मारा ये बस्ती चैन से क्यों सो रही है चल दिल …

मुमकिन नहीं मता-ए-सुख़न

मुमकिन नहीं मता-ए-सुख़न मुझ से छीन ले गो बाग़बाँ ये कंज-ए-चमन मुझ से छीन ले गर एहतराम-ए-रस्म-ए-वफ़ा है तो ऐ ख़ुदा ये एहतराम-ए-रस्म-ए-कोहन मुझ से छीन ले मंज़र दिल-ओ-निगाह …

फिर सावन रुत की पवन चली

फिर सावन रुत की पवन चली तुम याद आये फिर पत्तों की पाज़ेब बजी तुम याद आये फिर कुँजें बोलीं घास के हरे समन्दर में रुत आई पीले फूलों …

फिक्र-ए-तामीर-ए-आशियाँ भी है

फिक्र-ए-तामीर-ए-आशियाँ भी है खौफ-ए-बे माहरी-ए-खिजाँ भी है खाक भी उड़ रही है रास्तों में आमद-ए-सुबह-ए-समाँ भी है रंग भी उड़ रहा है फूलों का गुंचा-गुंचा सर्द-फसाँ भी है ओस …

दिल में इक लहर सी उठी है अभी

दिल में इक लहर सी उठी है अभी कोई ताज़ा हवा चली है अभी शोर बरपा है ख़ाना-ए-दिल में कोई दीवार सी गिरी है अभी कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज …

दिल धड़कने का सबब याद आया

दिल धड़कने का सबब याद आया वो तेरी याद थी अब याद आया आज मुश्किल था सम्भलना ऐ दोस्त तू मुसीबत में अजब याद आया दिन गुज़ारा था बड़ी …

तेरे ख़याल से लौ दे उठी है तनहाई

तेरे ख़याल से लौ दे उठी है तनहाई शब-ए-फ़िराक़ है या तेरी जल्वाआराई तू किस ख़याल में है ऐ मंज़िलों के शादाई उन्हें भी देख जिन्हें रास्ते में नींद …

तन्हा इश्क के ख़्वाब ना बुन

तन्हा इश्क के ख़्वाब न बुन कभी हमारी बात भी सुन थोड़ा ग़म भी उठा प्यारे फूल चुने हैं ख़ार भी चुन सुख़ की नींदें सोने वाले मरहूमी के …

ज़िन्दगी को न बना दें वो सज़ा मेरे बाद

ज़िन्दगी को न बना दें वो सज़ा मेरे बाद हौसला देना उन्हें मेरे ख़ुदा मेरे बाद कौन घूंघट उठाएगा सितमगर कह के और फिर किस से करेंगे वो हया …

ज़बाँ सुख़न को, सुख़न बाँकपन को तरसेगा

ज़बाँ सुख़न को सुख़न बाँकपन को तरसेगा सुख़नकदा मेरी तर्ज़-ए-सुख़न को तरसेगा नये प्याले सही तेरे दौर में साक़ी ये दौर मेरी शराब-ए-कोहन को तरसेगा मुझे तो ख़ैर वतन …

गिरिफ़्ता-दिल हैं बहुत

गिरिफ़्ता-दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने ख़ुदा करे कोई तेरे सिवा न पहचाने मिटी-मिटी सी उम्मीदें थके-थके से ख़याल बुझे-बुझे से निगाहों में ग़म के अफ़साने हज़ार शुक्र के …

कौन इस राह से गुज़रता है

कौन इस राह से गुज़रता है दिल यूँ ही इंतज़ार करता है देख कर भी न देखने वाले दिल तुझे देख-देख डरता है शहर-ए-गुल में कटी है सारी रात …