Category: नरेश सक्सेना

सूनी सँझा, झाँके चाँद

सूनी सँझा, झाँके चाँद मुँडेर पकड़ कर आँगना हमें, कसम से, नहीं सुहाता- रात-रात भर जागना । रह-रह हवा सनाका मारे यहाँ-वहाँ से बदन उघारे पिछवारे का पीपल जाने- …

साँकल खनकाएगा कौन

दिन भर की अलसाई बाहों का मौन, बाहों में भर-भर कर तोड़ेगा कौन, बेला जब भली लगेगी। आज चली पुरवा, कल डूबेंगे ताल, द्वारे पर सहजन की फूलेगी डाल, …

रात भर

रात भर चलती हैं रेलें ट्रक ढोते हैं माल रात भर कारख़ाने चलते हैं कामगार रहते हैं बेहोश होशमंद करवटें बदलते हैं रात भर अपराधी सोते हैं अपराधों का …

रह-रह कर आज साँझ मन टूटे

रह-रह कर आज साँझ मन टूटे- काँचों पर गिरी हुई किरणों-सा बिछला है तनिक देर को छत पर हो आओ चाँद तुम्हारे घर के पिछवारे निकला है । प्रश्नों …

मनुष्यशक्ति

कितना कोयला होगा मेरी देह में कितनी कैलोरी कितने वाट कितने जूल कितनी अश्वशक्ति (मैं इसे मनुष्यशक्ति कहूंगा) कितनी भी ठंडक हो बर्फ़ हो अंधेरा हो एक आदमी को …

बैठे हैं दो टीलें

तनिक देर और आसपास रहें चुप रहें, उदास रहें, जाने फिर कैसी हो जाए यह शाम। एक-एक कर पीले पत्तों का टूटते चले जाना, इतने चुपचाप, और तुम्हारा पलकें …

फूले फूल बबूल कौन सुख, अनफूले कचनार

फूले फूल बबूल कौन सुख, अनफूले कचनार । वही शाम पीले पत्तों की गुमसुम और उदास वही रोज़ का मन का कुछ- खो जाने का एहसास टाँग रही है …

परसाई जी की बात

पैंतालिस साल पहले, जबलपुर में परसाई जी के पीछे लगभग भागते हुए मैंने सुनाई अपनी कविता और पूछा क्या इस पर ईनाम मिल सकता है “अच्छी कविता पर सज़ा …

नीम की पत्तियाँ

कितनी सुन्दर होती हैं पत्तियाँ नीम की ये कोई कविता क्या बताएगी जो उन्हें मीठे दूध में बदल देती है उस बकरी से पूछो पूछो उस माँ से जिसने …

दरार

ख़त्म हुआ ईंटों के जोड़ों का तनाव प्लास्टर पर उभर आई हल्की-सी मुस्कान दौड़ी-दौड़ी चीटियाँ ले आईं अपना अन्न-जल फूटने लगे अंकुर जहाँ था तनाव वहाँ होने लगा उत्सव …

तुम वही मन हो कि कोई दूसरे हो

कल तुम्हें सुनसान अच्छा लग रहा था आज भीड़ें भा रही हैं तुम वही मन हो कि कोई दूसरे हो गोल काले पत्थरों से घिरे उस सुनसान में उस …