Category: नरेन्द्र कुमार

* उनकी चाहत *

उनसे बात हुई बहुत बार मुलाकात हुई एक दूजे को जाना पहचाना विचारों की आत्मसात हुई , वो बोली मैं कमसिन कली हूँ आप हो उम्र दराज माहाबली आप …

* माँ मुझे बच्चा रहना है *

माँ मुझे बच्चा रहना है बड़ी-बड़ी बातें हमें नहीं करना सहिष्णुता-असहिष्णुता का पाठ हमें नहीं पढ़ना इमाईनुल , मोहन, रहीम संग खेलना है माँ मुझे बच्चा रहना है । …

* रेला -रैली *

रेला है भाई रैली है सभी जगह धकमपेली है, पार्टी नेता करते अहवान गाते अपना गुण करते जयगान , लोग भी गजब मूर्ख बनाते कुछ देहारी में कुछ बेरोजगारी …

* चलो आग भड़काए * (व्यंग)

गाँव टोला मुहल्ले में आज हुई है बाता-बाती चलो इसे किसी तरह और बढ़ाएँ चलो आग भड़काए लोगों को दो गुटों में बाटें उलटा-सुलटा समझाएँ चलो आग भड़काए भाई-भाई …

* मोहम्मद आजाओ *

हमने न गीता पढ़ा न पढ़ा रामायण न पढ़ा मोहम्मद का कुराण और आयत, न मुझे शब्द ज्ञान न मुझे धर्म ज्ञान इनकी है जो वर्तमान स्थिती नहीं है …

* प्रकृति *

प्रकृति ने ब्रह्माण्ड बनाया , सूर्य बनाया चाँद बनाया समुन्द्र और धरातल बनाया वन उपवन नदी झड़ना से इसे सजाया , अनिको जीव-जंतु यहाँ बसाया , हर प्राणी का …

* भगवान हमें माफ करना *

भगवान हमें माफ करना हमारे जैसो को यहाँ न भेजना। हमें कुछ आता नहीं झूठा वादा किया जाता नहीं साठ-गाठ बैठता नहीं सत्ता के गलियारे में पहुंच बनता नहीं। …

* तुलसी और कबीर *

तुलसीदास ने चौपाई लिखा , कबीर ने साखी सुनाई। जो होगा और हो रहा , सच्ची दिया बताई।। एक सगुनी दूजा निर्गुणी , दोनों ही राम को माने। कर्म …

* किसने क्या बनाया *

किसने क्या बनाया , इसका किसे है ऐहसास लोग कहते हैं इसने यह बनाया , उसने वह बनाया , वे झूठ बोलते हैं करते हैं बकवास , प्रकृति में …

* माता *

माता वो हैं जिन्हें कुछ भाता नहीं अपने संतान के सिवा उन्हें कुछ सुहाता नहीं। खुद भूखा रहे संतान को खिलाए उनका पेट भरा है ऐसा वो जताए। संतान …

* वो *

खड़ा-खड़ी वह बात करता नहीं सुनती किसी का बकवास कर्म में वह रखता विश्वास नहीं करता चिकनी-चुपड़ी बात कहते हैं वह बड़ा वो…. है। वह अपने कर्म में लीन …

* मानते हैं *

क्या आप जानते हैं इस बात को मानते हैं लोग अपनी सभ्यता संस्कृति भूल पश्चमी संस्कृति को अपना रहे , अपना आन-बान शान छोड़ उसके धूल(तलवा) को चाट रहें …

* आया बसंत *

देखो-देखो आया बसंत, प्रेम उल्लास लाया बसंत। अन्नपूर्णा इठला रही, खेत-खलिहान में लहलहा रही ।। सरस्वती भी आई हैं, ज्ञान गंगा बरसाई है । काम देव नाच रहा, प्रेम …

* कोशिश *

माना की तुम विद्वान नहीं किसी विषय-वस्तु का विशेष ज्ञान नहीं अलग से कोई पहचान नहीं अन्दर तेरे दम्भ और अभिमान नहीं कोशिश करने में क्या जाता है जो …

* बसन्त है मनभावन *

बसन्त है मनभावन सुन्दर इसका मुखड़ा सुन्दर है पहिरावन इसे देखने कामदेव संग रति आई नृत्य संग इसे रमणी बनाई काम क्रीड़ा में लोगों को लिपटाई , संतो को …

* मैं हूँ तुम्हारे अंदर *

सभी हमें जानते हैं अपना हमें मानते हैं सभी मेरा मेरा करते हैं पूजा जैसे उन्हें काम नहीं कोई दूजा। ऐसे भी लोग हैं जो स्वार्थ में लिप्त हैं …

* ग्रह नक्षत्र का चक्कर *

भागम भाग भरी है जिंदगी जब से मैं जन्म लिया तब से हमारे संग सभी रहें भाग , जब मैं प्रथम प्रकाश देखा शनि का साढ़े साती था और …