Category: नानकदेव

झूठी देखी प्रीत

जगत में झूठी देखी प्रीत। अपने ही सुखसों सब लागे, क्या दारा क्या मीत॥ मेरो मेरो सभी कहत हैं, हित सों बाध्यौ चीत। अंतकाल संगी नहिं कोऊ, यह अचरज …

जो नर दुख में दुख नहिं मानै

जो नर दुख में दुख नहिं मानै। सुख सनेह अरु भय नहिं जाके, कंचन माटी जानै।। नहिं निंदा नहिं अस्तुति जाके, लोभ-मोह अभिमाना। हरष शोक तें रहै नियारो, नाहिं …