Category: नागरीदास

बोलनि ही औरैं कछू

बोलनि ही औरैं कछू, रसिक सभा की मानि। मतिवारे समझै नहीं, मतवारे लैं जानि। मतवारे लैं जानि आन कौं वस्तु न सूझै। ज्यौ गूंगे को सैन कोउ गूंगो ही …

ताननि की ताननि मही

ताननि की ताननि मही, परयौजुमन धुकि धाहिं। पैठयो रव गावत स्त्रवनि, मुख तैं निसरत आहि॥ मुख तैं निसरत आहि! साहि नहिं सकत चोट चित। ज्ञान हरद तैं दरद मिटत …

चरचा करी कैसे जाय

चरचा करी कैसे जाय। बात जानत कछुक हमसों, कहत जिय थहराय॥ कथा अकथ सनेह की, उर नारि आवत और। बेद रामृती उपनिषद् कों, रही नाहिंन ठौर॥ मनहि में है …