Category: नादिर अहमद खान

तरही गज़ल

नाम अल्लाह का लेकर मै निकल जाऊँगा मै जो हालात का मारा हूँ, संभल जाऊँगा | दूर मंज़िल है बहुत राह में दुश्वारी भी हाथ में हाथ दे वरना मै फिसल जाऊँगा …

एक दिन बेटा नाम करेगा

पिता ने जब  सुना शहर की पढ़ाई के बारे में रख दिया गिरवी पुश्तैनी खेत और भेज दिया शहर के बड़े हॉस्टल अपने बेटे को जब पढ़ानी थी, इंजीनियरिंग …

दामिनी तुम जिंदा हो

दामिनी तुम जिंदा हो हर औरत का हौंसला बनकर न्याय की आवाज़ बनकर वक्त की ज़रूरत बनकर आस्था की पुकार बनकर एकता की मिसाल बनकर तुम लाखों दिलों में …

दुआओं में सबके

दुआओं में सबके है आना जाना क्या मेरा क्या तुम्हारा ठिकाना   सपनों में आना यादों में मिलना बस छोटा-सा है, हमारा घराना   सस्ती है यहाँ जान हमारी-तुम्हारी …

अपनी चीख़ों से बेचैन

अपनी चीख़ों से बेचैन सो न पाया था तुम्हे इसीलिये मै जगाने आया था   बहुत बड़े थे तुम्हारी उम्मीदों के पहाड़ मै प्यार की पाठशाला में नया आया …

छोडकर सबकुछ

छोडकर सब-कुछ नया आगाज़ करते हैं नहीं शिकवा-शिकायत हंसी मजाक करते हैं   सिर्फ गम ही तो नहीं दिये हमें ज़िंदगी ने बाढ़-तूफ़ान छोड़िये फसल की बात करते हैं …

सर जी

तुमने सोचा तो बहुत था हमें बेड़ियों में बाँध अपने इशारों पर नचाओगे चाबुक दिखाकर डराओगे   तुम आगे चलोगे हम तुम्हारे पीछे कटोरा लेकर दौड़ेंगे जब तुम्हारा जी …

सावधान

परिंदो धीरे उड़ो सावधान उड़ो वर्ना तुम्हारे पर कट जाएंगे तलवारें हवाओं में लटकी हैं यकीनन यह किसी जादूगर का कमाल है कि तुम्हें ये तलवारें नहीं दिख रहीं …

तुम्हारी आवाज़ पे

तुम्हारी आवाज़ पे ठहर जाता हूँ ख़ामोश निगाहों से डर जाता हूँ   तुम्हारे होने का एहसास ही तो है तुम ही तुम हो  जिधर जाता हूँ   दरवाज़े …

दिल परेशां ही सही

दिल परेशां ही सही आस जगाये राखिये अपने बच्चों में संस्कार बनाये राखिये   माना कि भाग-दौड़ है जिंदगी में बहुत मेहमानों से घर अपना सजाये राखिये   अजब …

क्या हुआ

क्या हुआ अगर तुम्हें तुम्हारे कुत्ते ने काट लिया तुम्हें तो ख़ुश होना चाहिए वह भी सीख गया है तुम्हारी तरह तुम्हारा व्यवहार तुम्हारा अपनापन |

इन हवाओं में घुली है

इन हवाओं में घुली  है  दास्तानें  प्यार की हो नहीं सकती अलग ख़ुशबू हमारे प्यार की   हम  नहीं  बदले,  मौसम कई आए-गए महकना सबके लिए, हैं फितरतें प्यार …

ज़रूरी तो नहीं जो दिखते हो वही तुम हो

ज़रूरी तो नहीं जो दिखते हो वही तुम हो रस्सी हम समझे थे वो साँप की दुम हो   अपना खूँ ए उबाल ज़रा संभाल कर रखो हम भी …

फिर एकबार…

जब-जब  उम्मीद बनती है लोगों का लोगों पर विश्वास जागता है सामने से कोई पत्थर आता है और तमाम सुरक्षा घेरे को तोड़ता हुआ इंसानियत के माथे पर पड़ता …

कुछ नियम

कुछ नियम ख़ास-ओ-आम होना चाहिए दुआ सलाम सुबह-शाम होना चाहिए    नज़र ज़रूरी है सबकी कारगुज़ारी पर ख़ुद का मगर गिरहबान होना चाहिए    आपकी तरक्की से हम नहीं …

दम तोड़ती रही ज़िंदगी रात-भर

दम तोड़ती रही ज़िंदगी रात-भर बेपरवाह महफ़िलें सजीं रात-भर   दंगों में मरते रहे बच्चे-बूढ़े सभी इंसानियत शर्मशार रही रात-भर   थी आज़ादी की सालगिरह जश्ने माहौल भी झोपड़ियों …

अक्सर हमारे हाथ यही रह जाता है

अक्सर हमारे हाथ  यही रह जाता है डर और पैसे में इंसाफ़ बिक जाता है  है झूठ तो फाँसी पे चढ़ा दो मुझको इंसाफ के इंतज़ार में इंसान ही …