Category: मो. जुनैद अहमद

करप्शन

ये चिंता नहीं चिताएँ हैं . देश में अनेक समस्याएँ हैं. जिसका मुँह काला और कैरेक्टर है ढीला -ढाला, हर तरफ है उस करप्शन का बोल-बाला. जिसने देश का …

विकसित हो रहा विनाश

टूटा आस अब कहाँ बुझाएं प्यास ? बिखर गया आशियाना. छूट गया आवास . पूछ रहा बेज़ुबान. अए मनुष्य महान ? उठने की लालसा ने , तेरा कितना मानसिक …

तम दूर भगाएं

अंदर का अंधकार मिटायें, धरती का तम दूर भगाएं. घनघोर निराशा अन्धकार छाई है, हर ओर अन्धकार आज भाई है. मर रही मानवता से ये तबाही है, चहूँ ओर …

नारी एक नज़रिया

नारी एक नज़रिया जीवन को समझने का ज़रिया पर दुर्भाग्य हमारी, जो अर्धांग्नी कहलाये उसे हम आज तक समझ ना पाये जबसे हुई तेरी प्रस्तुति करते आये सभी स्तुति …