Category: मनिंदर सिंह मनी

“एक सफ़र” – दुर्गेश मिश्रा

– एक सफ़र देखे मैंने इस सफर में दुनिया के अद्भुत नज़ारे, दूर बैठी शोर गुल से यमुना को माटी में मिलते | की देखा मैंने इस सफर में….. …

“भारतीय नारी”—–मनिंदर सिंह “मनी”

प्राचीन काल से ही नारी का विशेष स्थान रहा है हमारे समाज में | गीता में एक श्लोक कहा गया है यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता अर्थात जहाँ …

बदलता जमाना

वक़्त है आज गुजर जाएगा तेरा साथ है एक दिन छूट जाएगा बदलेगा जमाना तू भी बदल जाएगा वक़्त है आज गुजर जाएगा तू आज साथ है मै बड़ा …

भीड़ मे खो जाने दो

भीड़ है भीड़ मे खो जाने दो कुछ अपना सा हो जाने दो तनहा हूँ मैं , तनहा हो जाने दो एक बस मकसद है , पूरा हो जाने …

नज़्म-आज सरहद करे बात सरहद से मिल….मनिंदर सिंह “मनी”

आज सरहद करे बात सरहद से मिल | कुछ गिले कर लिए आज आपस में मिल || बहा है खून बेटो का दोनों तरफ | कौन किसका करे बात …

ग़ज़ल-मिलो उस ही गली में तुम कभी फिर से सनम हम को….मनिंदर सिंह “मनी”

मिलो उस ही गली में तुम कभी फिर से सनम हम को | जहाँ पाया था हमने इश्क में महकी सी शबनम को || कहीं हमने कभी तुमने तराना …

ग़ज़ल- बहे अश्क यूँ दर्द के आज आँखों से मेरी…मनिंदर सिंह “मनी”

बहे अश्क यूँ दर्द के आज आँखों से मेरी | लिया कर किनारा हो तुमने अदाओ से मेरी || सजी मेरी महफ़िल सनम सिर्फ तेरे लिये ही | लगे …

ग़ज़ल-खुशबू चमन की मेरे कोई ले गया–मनिंदर सिंह “मनी”

खुशबू चमन की मेरे कोई ले गया | नफरत भरी कैसी फ़िज़ा ये दे गया || कहती दिखे दुनिया गमो की बात को | जाने ख़ुशी के कौन सब …

ग़ज़ल- दिलबर तेरी इस दिल को खबर आये तो बेहतर…मनिंदर सिंह “मनी”

दिलबर तेरी इस दिल को खबर आये तो बेहतर | तेरे आने वाली फिर सहर आये तो बेहतर || साँसे मेरी दम तोड़ रही यादों में तेरी | दिल …

ग़ज़ल-छलकता अश्क आँखों से लिये खुद में कहानी है–मनिंदर सिंह “मनी”

छलकता अश्क आँखों से लिये खुद में कहानी है | कहीं दिल की तड़प सा तो कहीं ये सिर्फ पानी है || कभी दिल में सजे सपनो को पूरा …

ग़ज़ल- नहीं दिख रहा जग में कोई बशर सा…मनिंदर सिंह “मनी”

नहीं दिख रहा जग में कोई बशर सा | खत्म ही लगे अब नेकी का असर सा || खबर क्या किसी को डगर की बताओ | पहेली लगे जिंदगी …

ग़ज़ल-मुझे पाने की हसरत दिख रही है तेरी आँखों में–मनिंदर सिंह “मनी”

मुझे पाने की हसरत दिख रही है तेरी आँखों में | रखे है आज भी जिन्दा मुझे तू अपनी सासों में || कभी तुमने वफ़ा की आरजू की थी …

ग़ज़ल-मुझे तुम छोड़कर तन्हा कहाँ जाने लगे दिलबर-मनिंदर सिंह “मनी”

मुझे तुम छोड़कर तन्हा कहाँ जाने लगे दिलबर | कभी हम थे तेरे ही अब किसे पाने लगे दिलबर || किये वादे कभी मुझसे न छोड़ोगे अकेले तुम | …

ग़ज़ल- वो हमें देखकर मुस्कुराने लगे |

वो हमें देखकर मुस्कुराने लगे | हाल नज़रो से दिल का बताने लगे || है उठाते गिराते लटों को कभी | वो अदाओं की बिजली गिराने लगे || हाल …

ग़ज़ल-हैं नहीं आग कलमो में पुरानी सी यारो |

ग़ज़ल-हैं नहीं आग कलमों में पुरानी सी यारों | हैं नहीं आग कलमों में पुरानी सी यारों | बात दिखती नहीं कोई सयानी सी यारों || क्यों नहीं बन …

इश्क की सजा—-मनिंदर सिंह “मनी”

कभी नीले आसमाँ के तले, हमनवां मुझे थे तुम मिले, नीले सागर के किनारे, नैन से नैन मिले हमारे, बैठा सपनो की किश्ती में, वादे हुये दिल की बस्ती …

ग़ज़ल- कब से मेरा तडपे हैं दिल-मनिन्दर सिंह “मनी”

कब से मेरा तडपे हैं दिल । अाकर मुझ को साजन तू मिल ।। यादों में तेरी खोया मैं । दिल में मेरे तू बस कर खिल ।। दीवाना …

गीत-राह उम्र भर देखूंगी तेरी-मनिंदर सिंह “मनी”

राह उम्र भर देखूंगी तेरी, जिद है ये खुद से मेरी कहे जमाना कुछ भी मुझ को, रब है माना मैंने तुझ को, मेरी हर धड़कन है तेरी, राह …