Category: महावीर उत्तरांचली

साईं, आन पड़े हम तेरे धाम

साईं सलोना रूप है, साईं हरि का मान देह अलौकिक गंध है, प्रेम अमर पहचान // दोहा // साईं, साईं, आन पड़े हम तेरे धाम साईं, साईं, आन पड़े …

बाबा हम शिरडी आये

बाबा हम शिरडी आये, तेरे दर्शन करने साईं-साईं जपते-जपते, कष्ट लगे हैं मिटने बाबा हम शिरडी आये….. दूर-दूर से लोग हैं आते, अपनी व्यथा सुनाते बस्ती-बस्ती, पर्वत-पर्वत, तेरे ही …

तू मेरा साईं, तू मेरा राम है

तू मेरा साईं, तू मेरा राम है। तेरी पूजा निसदिन मेरा काम है।। हो…..हो…..हो….. नहीं तुझसे बड़ा है संत कोई…. और गुरु कोई…. तेरी भक्ति, तेरी शक्ति, जीवन का …

अपने भीतर, तू निरंतर

न हो मायूस साईं के दर पे बदल जाएँगी तस्वीरें मिट जायेंगे ये दुःख सारे, बदल जाएँगी तकदीरें // शे’र // अपने भीतर, तू निरंतर, लौ जला ईमान की …

ख़ुश-हाल, ख़ुश-हाली—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

((1.) इक दिया नाम का ख़ुश–हाली के उस के जलते ही ये मालूम हुआ —कैफ़ी आज़मी (2.) ना–शनास–ए–रू–ए–ख़ुश–हाली है तब–ए–ग़म–नसीब जब मसर्रत सामने आई झिजक कर रह गई —साक़िब …

बद-गुमानी—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) आपस में हुई जो बद–गुमानी मुश्किल है निबाह दोस्ती का —हफ़ीज़ जौनपुरी (2.) तुम रहे पाक–साफ़ दिल हर दम मैं रहा सिर्फ़ बद–गुमानी में —महावीर उत्तरांचली (3.) हिफ़ाज़त …

रोटियाँ—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) डाल दीं भूके को जिस में रोटियाँ वह समझ पूजा की थाली हो गई —नीरज गोस्वामी (2.) है मुश्किल दौर सूखी रोटियाँ भी दूर हैं हम से मज़े …

तकलीफ़—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) शहर में है इक ऐसी हस्ती जिस को मिरी तकलीफ़ बड़ी है —राजेन्द्र नाथ रहबर (2.) बड़ी तकलीफ़ देते हैं ये रिश्ते यही उपहार देते रोज़ अपने —महावीर …

किरदार—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) इस के सिवा अब और तो पहचान कुछ नहीं जाऊँ कहाँ मैं अपना ये किरदार छोड़ कर —भारत भूषण पन्त (2.) व्यवस्था कष्टकारी क्यूँ न हो किरदार ऐसा …

निशानी—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) दास्ताँ–गो की निशानी कोई रक्खी है कि वो दास्ताँ–गोई के दौरान कहाँ जाता है —शाहीन अब्बास (2.) उन की उल्फ़त में ये मिला हम को ज़ख़्म पाए हैं …

खेल—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) इस का छुपाना खेल नहीं है राज़ और वो भी उन का राज़ —मोहम्मद मंशाउर्रहमान ख़ाँ मंशा (2.) खेल में भावना है ज़िंदा तो फ़र्क़ कुछ हार से …

“उग”–”उगाते”—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) ये वही गाँव हैं फ़सलें जो उगाते थे कभी भूक ले आई है इन को तो नगर में रख लो —प्रेम भण्डारी (2.) हम साँप पकड़ लेते हैं …

“बज”–”बजाते”—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) याद इक हीर की सताती है बाँसुरी जब कभी बजाते हैं —मुमताज़ राशिद (2.) कभू करते हो झाँझ आ हम से कभी झाँझ और दफ़ बजाते हो —मिर्ज़ा …

लपेटे—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) कफ़न से मुँह लपेटे मेरी हसरत दिल-ए-वीराँ के कोने में पड़ी है —बयान मेरठी (2.) उस पे कल रोटियाँ लपेटे सब कुछ भी अख़बार से नहीं होता —महावीर …

ख़ुद्दार—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) तबीअत इस तरफ़ ख़ुद्दार भी है उधर नाज़ुक मिज़ाज–ए–यार भी है —जिगर मुरादाबादी (2.) नहीं टूटे कभी जो मुश्किलों से बहुत ख़ुद्दार हम ने लोग देखे —महावीर उत्तरांचली …

उलझन—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.) इलाही ख़ैर हो उलझन पे उलझन बढ़ती जाती है न मेरा दम न उन के गेसुओं का ख़म निकलता है —सफ़ी लखनवी (2.) ज़ामिन मिरी उलझन के उलझे …

ग़रीबों—संकलनकर्ता: महावीर उत्तराँचली

(1.) ये शाह–राहों पे रंगीन साड़ियों की झलक ये झोंपड़ों में ग़रीबों के बे–कफ़न लाशे —साहिर लुधियानवी (2.) अमीर लोगों की कोठियों तक तिरे ग़ज़ब की पहुँच कहाँ है …

धनक—संकलनकर्ता: महावीर उत्तराँचली

(1.) साथ रखता हूँ हमेशा तिरी यादों की धनक मैं कभी ख़ुद को अकेला नहीं होने देता —नासिर ज़ैदी (2.) सुना है बावजूद-ए-ज़ोर हम ने धनक रावण से भी …

अनहोनी—संकलनकर्ता: महावीर उत्तराँचली

(1.) दिन में तारे देखे थे अनहोनी भी होनी थी —आबिद मुनावरी (2.) एक खिलौना टूट गया तो और कई मिल जाएँगे बालक ये अनहोनी तुझ को किस बैरी …

कडुवे—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1) इस वक़्त हम से पूछ न ग़म रोज़गार के हम से हर एक घूँट को कड़वा किया न जाए —जाँ निसार अख़्तर (2) मरीज़-ए-ख़्वाब को तो अब शिफ़ा …

छिन गया रुत्बा तो क्या है

छिन गया रुत्बा तो क्या है पास अपने हौसला है तूने मुझको मन से चाहा दिल कहे तू देवता है तूने छोड़ा उसपे सब कुछ देख वो क्या मांगता …

थोड़ा और गहरे उतरा जाये

थोड़ा और गहरे उतरा जाये तब जाकर इश्क में डूबा जाये लफ़्ज़ों में शामिल अहसासों को महसूस करूँ तो समझा जाये है ज़रूरी ये कोरे काग़ज़ पर जो सोचा …

अमर गीत “आएगा आने वाला” व “महल” से जुड़ी त्रासदियाँ

जी हैं, शीर्षक से सही पहचाना आप सबने। मैं ज़िक्र कर रहा हूँ “महल” (1949) की फ़िल्म का। जिसके निर्देशक थे कमाल अमरोही। संगीतकार थे खेमचन्द प्रकाश। चार गीत (नक्शब …

31 जुलाई और दो सितारे (प्रेमचन्द, रफ़ी पर विशेष)

लेख शुरू करने से पूर्व मैं पाठकों को दो चित्रों से अवगत करना चाहूंगा:— पहला चित्र:— “प्रेमचंद” की शवयात्रा गुज़र रही थी। तब सामने से गुज़रते किसी अपरिचित व्यक्ति …