Category: मदन मोहन सक्सेना

मेरी ग़ज़ल जय विजय ,बर्ष -३ अंक ३ ,दिसम्बर २०१६ में प्रकाशित

प्रिय मित्रों मुझे बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि मेरी ग़ज़ल जय विजय ,बर्ष -३ , अंक ३ ,दिसम्बर २०१६ में प्रकाशितहुयी है . आप भी अपनी …

मुझे दिल पर अख्तियार था ये कल की बात हैमुझे दिल पर अख्तियार था ये कल की बात है

उनको तो हमसे प्यार है ये कल की बात है कायम ये ऐतबार था ये कल की बात है जब से मिली नज़र तो चलता नहीं है बस मुझे …

अहसान ज़माने का है यार मुझ पर

अहसान ज़माने का है यार मुझ पर किस ज़माने की बात करते हो रिश्तें निभाने की बात करते हो अहसान ज़माने का है यार मुझ पर क्यों राय भुलाने …

सच्ची बात किसको आज सुनना अच्छी लगती है

कभी अपनों से अनबन है कभी गैरों से अपनापन दिखाए कैसे कैसे रँग मुझे अब आज जीबन है ना रिश्तों की ही कीमत है ना नातें अहमियत रखतें रिश्तें …

देखते है कि आपका मुँह खुलेगा भी या नहीं

होली के अबसर पर पानी की बर्बादी की बात करने बाले शिवरात्रि पर शिव पर दूध अर्पित करने को कुपोषण से जोड़ने बाले और दूध की कमी का रोने …

मुक्तक (सब अपनी अपनी किस्मत को ले लेकर खूब रोते हैं)

रोता नहीं है कोई भी किसी और के लिए सब अपनी अपनी किस्मत को ले लेकर खूब रोते हैं प्यार की दौलत को कभी छोटा न समझना तुम होते …

ग़ज़ल ( क्या जज्बात की कीमत चंद महीने के लिए है )

दर्द को अपने से कभी रुखसत ना कीजिये क्योंकि दर्द का सहारा तो जीने के लिए है पी करके मर्जे इश्क़ में बहका ना कीजिये ख़ामोशी की मदिरा तो …

ग़ज़ल (बीती उम्र कुछ इस तरह कि खुद से हम ना मिल सके)

कल तलक लगता था हमको शहर ये जाना हुआ इक शख्श अब दीखता नहीं तो शहर ये बीरान है बीती उम्र कुछ इस तरह कि खुद से हम ना …

( ग़ज़ल )हर पल याद रहती है निगाहों में बसी सूरत

सजा क्या खूब मिलती है किसी से दिल लगाने की तन्हाई की महफ़िल में आदत हो गयी गाने की हर पल याद रहती है निगाहों में बसी सूरत तमन्ना …

कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है

अँधेरे में रहा करता है साया साथ अपने पर बिना जोखिम उजाले में है रह पाना बहुत मुश्किल ख्वाबों और यादों की गली में उम्र गुजारी है समय के …

ग़ज़ल (निगाहों में बसी सूरत फिर उनको क्यों तलाशे है )

कुछ इस तरह से हमने अपनी जिंदगी गुजारी है जीने की तमन्ना है न मौत हमको प्यारी है लाचारी का दामन आज हमने थाम रक्खा है उनसे किस तरह …

आज हम फिर बँट गए ज्यों गड्डियां हो तास की

नरक की अंतिम जमीं तक गिर चुके हैं आज जो नापने को कह रहे , हमसे बह दूरियाँ आकाश की आज हम महफूज है क्यों दुश्मनों के बीच में …

ग़ज़ल (मौत के साये में जीती चार पल की जिन्दगी)

ग़ज़ल (मौत के साये में जीती चार पल की जिन्दगी) आगमन नए दौर का आप जिसको कह रहे वो सेक्स की रंगीनियों की पैर में जंजीर है सुन चुके …

सांसों के जनाजें को तो सव ने जिंदगी जाना

सांसों के जनाजें को तो सव ने जिंदगी जाना देखा जब नहीं उनको और हमने गीत ना गाया जमाना हमसे ये बोला की फागुन क्यों नहीं आया फागुन गुम …

प्रेम के रिश्ते हों सबसे ,प्यार का संसार हो

हे रब किसी से छीन कर मुझको ख़ुशी ना दीजिये जो दूसरों को बख्शी को बो जिंदगी ना दीजिये तन दिया है मन दिया है और जीवन दे दिया …

गज़ल (तुमने उस तरीके से संभारा भी नहीं होगा)

तुम्हारी याद जब आती तो मिल जाती ख़ुशी हमको तुमको पास पायेंगे तो मेरा हाल क्या होगा तुमसे दूर रह करके तुम्हारी याद आती है मेरे पास तुम होगें …

ग़ज़ल (बचपन यार अच्छा था हँसता मुस्कराता था)

ग़ज़ल (बचपन यार अच्छा था हँसता मुस्कराता था) जब हाथों हाथ लेते थे अपने भी पराये भी बचपन यार अच्छा था हँसता मुस्कराता था बारीकी जमाने की, समझने में …

ग़ज़ल (आये भी अकेले थे और जाना भी अकेला है)

पैसोँ की ललक देखो दिन कैसे दिखाती है उधर माँ बाप तन्हा हैं इधर बेटा अकेला है रुपये पैसोँ की कीमत को वह ही जान सकता है बचपन में …

ग़ज़ल (दोस्ती आती नहीं है रास अब बहुत ज्यादा पास की)

ग़ज़ल (दोस्ती आती नहीं है रास अब बहुत ज्यादा पास की) नरक की अंतिम जमीं तक गिर चुके हैं आज जो नापने को कह रहे , हमसे बह दूरियाँ …