Category: मदन मोहन सक्सेना

ग़ज़ल(दुनियाँ में जिधर देखो हज़ारों रास्ते दीखते )

किसको आज फुर्सत है किसी की बात सुनने की अपने ख्बाबों और ख़यालों में सभी मशगूल दिखतें हैं सबक क्या क्या सिखाता है जीबन का सफ़र यारों मुश्किल में …

“एक सफ़र” – दुर्गेश मिश्रा

– एक सफ़र देखे मैंने इस सफर में दुनिया के अद्भुत नज़ारे, दूर बैठी शोर गुल से यमुना को माटी में मिलते | की देखा मैंने इस सफर में….. …

ग़ज़ल(ये रिश्तें काँच से नाजुक)

ग़ज़ल(ये रिश्तें काँच से नाजुक) ये रिश्तें काँच से नाजुक जरा सी चोट पर टूटे बिना रिश्तों के क्या जीवन ,रिश्तों को संभालों तुम जिसे देखो बही मुँह पर …

बदलता जमाना

वक़्त है आज गुजर जाएगा तेरा साथ है एक दिन छूट जाएगा बदलेगा जमाना तू भी बदल जाएगा वक़्त है आज गुजर जाएगा तू आज साथ है मै बड़ा …

भीड़ मे खो जाने दो

भीड़ है भीड़ मे खो जाने दो कुछ अपना सा हो जाने दो तनहा हूँ मैं , तनहा हो जाने दो एक बस मकसद है , पूरा हो जाने …

ग़ज़ल ( इस आस में बीती उम्र कोई हमें अपना कहे)

कभी गर्दिशों से दोस्ती कभी गम से याराना हुआ चार पल की जिन्दगी का ऐसे कट जाना हुआ इस आस में बीती उम्र कोई हमें अपना कहे अब आज …

चलो हम भी बोले होली है तुम भी बोलो होली है

मन से मन भी मिल जाये , तन से तन भी मिल जाये प्रियतम ने प्रिया से आज मन की बात खोली है मौसम आज रंगों का छायी अब …

प्यार जीवन की सुन्दर कहानी सी है

प्यार रामा में है प्यारा अल्लाह लगे ,प्यार के सूर तुलसी ने किस्से लिखे प्यार बिन जीना दुनिया में बेकार है ,प्यार बिन सूना सारा ये संसार है प्यार …

मेरी ग़ज़ल जय विजय ,बर्ष -३ अंक ३ ,दिसम्बर २०१६ में प्रकाशित

प्रिय मित्रों मुझे बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि मेरी ग़ज़ल जय विजय ,बर्ष -३ , अंक ३ ,दिसम्बर २०१६ में प्रकाशितहुयी है . आप भी अपनी …

मुझे दिल पर अख्तियार था ये कल की बात हैमुझे दिल पर अख्तियार था ये कल की बात है

उनको तो हमसे प्यार है ये कल की बात है कायम ये ऐतबार था ये कल की बात है जब से मिली नज़र तो चलता नहीं है बस मुझे …

अहसान ज़माने का है यार मुझ पर

अहसान ज़माने का है यार मुझ पर किस ज़माने की बात करते हो रिश्तें निभाने की बात करते हो अहसान ज़माने का है यार मुझ पर क्यों राय भुलाने …

सच्ची बात किसको आज सुनना अच्छी लगती है

कभी अपनों से अनबन है कभी गैरों से अपनापन दिखाए कैसे कैसे रँग मुझे अब आज जीबन है ना रिश्तों की ही कीमत है ना नातें अहमियत रखतें रिश्तें …

देखते है कि आपका मुँह खुलेगा भी या नहीं

होली के अबसर पर पानी की बर्बादी की बात करने बाले शिवरात्रि पर शिव पर दूध अर्पित करने को कुपोषण से जोड़ने बाले और दूध की कमी का रोने …

मुक्तक (सब अपनी अपनी किस्मत को ले लेकर खूब रोते हैं)

रोता नहीं है कोई भी किसी और के लिए सब अपनी अपनी किस्मत को ले लेकर खूब रोते हैं प्यार की दौलत को कभी छोटा न समझना तुम होते …

ग़ज़ल ( क्या जज्बात की कीमत चंद महीने के लिए है )

दर्द को अपने से कभी रुखसत ना कीजिये क्योंकि दर्द का सहारा तो जीने के लिए है पी करके मर्जे इश्क़ में बहका ना कीजिये ख़ामोशी की मदिरा तो …

ग़ज़ल (बीती उम्र कुछ इस तरह कि खुद से हम ना मिल सके)

कल तलक लगता था हमको शहर ये जाना हुआ इक शख्श अब दीखता नहीं तो शहर ये बीरान है बीती उम्र कुछ इस तरह कि खुद से हम ना …

( ग़ज़ल )हर पल याद रहती है निगाहों में बसी सूरत

सजा क्या खूब मिलती है किसी से दिल लगाने की तन्हाई की महफ़िल में आदत हो गयी गाने की हर पल याद रहती है निगाहों में बसी सूरत तमन्ना …

कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है

अँधेरे में रहा करता है साया साथ अपने पर बिना जोखिम उजाले में है रह पाना बहुत मुश्किल ख्वाबों और यादों की गली में उम्र गुजारी है समय के …

ग़ज़ल (निगाहों में बसी सूरत फिर उनको क्यों तलाशे है )

कुछ इस तरह से हमने अपनी जिंदगी गुजारी है जीने की तमन्ना है न मौत हमको प्यारी है लाचारी का दामन आज हमने थाम रक्खा है उनसे किस तरह …

आज हम फिर बँट गए ज्यों गड्डियां हो तास की

नरक की अंतिम जमीं तक गिर चुके हैं आज जो नापने को कह रहे , हमसे बह दूरियाँ आकाश की आज हम महफूज है क्यों दुश्मनों के बीच में …

ग़ज़ल (मौत के साये में जीती चार पल की जिन्दगी)

ग़ज़ल (मौत के साये में जीती चार पल की जिन्दगी) आगमन नए दौर का आप जिसको कह रहे वो सेक्स की रंगीनियों की पैर में जंजीर है सुन चुके …