Category: लल्लन प्रसाद

बोधिसत्व वृक्छ योनि में रुक्खधम्ब जातक

एक जन्म में आये बोधिसत्व वृक्छ देवता बन बड़े बड़े तरुओं से घिरा शाल वन सघन ढूढ रहे थे लोग सुरक्छित जगह निवास के लिए रहो घने वृक्छों की …

एक सा लगा

कई दिनों बाद बादलों से सूरज का झांकना महीनों बाद किसी उदास चहरे का मुस्कुराना बंद द्वार खोल कर चुपके से तुम्हारा अंदर आजाना एक सा लगा वीरान जंगल …