Category: कुशाग्र सिंह

ख़्याल तुम्हारा

बीती शब जागता रहा बंद दरीचे से झांकता रहा नजरों की जंग खाई कैंची से अपने हिस्से का आसमां काटता रहा इक टूटता तारा टिमटिमाती सूरत से दिल की …